Karnataka कर्नाटक: शहर के जूनियर कॉलेज ग्राउंड पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कई करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया मिनी-स्टेडियम अब बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया यह स्टेडियम अब बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उपयोग लायक नहीं बचा है।
स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों के अनुसार, स्टेडियम परिसर में जगह-जगह सीमेंट और पत्थरों के ढेर पड़े हुए हैं, जिससे पूरा मैदान अव्यवस्थित और जर्जर नजर आ रहा है। निर्माण के बाद उचित देखरेख न होने के कारण यह खेल परिसर धीरे-धीरे खराब स्थिति में पहुंच गया है।
जानकारी के अनुसार, कबड्डी, खो-खो, बॉल बैडमिंटन और वॉलीबॉल जैसे खेलों के लिए यहां कोर्ट बनाने पर लगभग पाँच करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। शुरुआत में इस परियोजना को शहर में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था।
हालांकि, आज की स्थिति में वहां खेल सुविधाओं का कोई स्पष्ट निशान दिखाई नहीं देता। मैदान में बनाए गए कोर्ट और संरचनाएं या तो क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं या पूरी तरह से उपयोग योग्य नहीं रही हैं।
स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम बनने के बाद उन्हें बेहतर सुविधाओं की उम्मीद थी, लेकिन समय के साथ रखरखाव के अभाव में यह मैदान खराब होता चला गया। अब स्थिति यह है कि यहां नियमित खेल गतिविधियां लगभग बंद हो चुकी हैं।
लोगों ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना का सही तरीके से रखरखाव नहीं किया गया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर देखभाल की जाती, तो यह स्टेडियम शहर के खिलाड़ियों के लिए एक बेहतर मंच बन सकता था।
खेल प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि स्टेडियम की मरम्मत और पुनर्विकास के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं, ताकि युवाओं को फिर से खेल गतिविधियों का लाभ मिल सके।
कुल मिलाकर, स्मार्ट सिटी योजना के तहत बनाया गया यह मिनी-स्टेडियम देखरेख के अभाव में अपनी उपयोगिता खोता जा रहा है और करोड़ों रुपये की लागत के बावजूद यहां खेल गतिविधियां लगभग ठप पड़ चुकी हैं।