Karnataka : बिदादी प्रोजेक्ट पर राजनीतिक टकराव

Update: 2026-06-24 05:07 GMT

Karnataka कर्नाटक: बेंगलुरु में प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच कर्नाटक के डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर ने केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी पर निशाना साधते हुए कहा है कि उन्हें इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के बजाय राज्य सरकार को रचनात्मक सुझाव देने चाहिए।

मंगलवार को बेंगलुरु में पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल के आवास पर जाने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए जी. परमेश्वर ने राज्य सरकार की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सरकार बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ा रही है और किसी भी तरह से किसानों को विभाजित करने की नीति नहीं अपनाई जाएगी।

डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को विश्वास में लेकर और बातचीत के माध्यम से इस परियोजना को लागू करना है। उन्होंने बताया कि कई किसान ऐसे हैं जिनके पास कम उपजाऊ या सूखी जमीन है, जिसे वे खुद भी अधिक लाभकारी नहीं मानते। ऐसे किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

जी. परमेश्वर के अनुसार, सरकार का रुख स्पष्ट है कि यदि किसानों को संतोषजनक मुआवजा दिया जाता है, तो वे अपनी जमीन छोड़ने के बाद भी वैकल्पिक जमीन लेकर खेती जारी रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसी संतुलित दृष्टिकोण के साथ सरकार आगे बढ़ रही है।

इस बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी बिदादी टाउनशिप मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी को पत्र लिखा है। उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए 26 तारीख को सुबह 11 बजे सभी मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी विधान सौधा में उपस्थित रहेंगे।

सीएम शिवकुमार ने अपने पत्र में कहा है कि इस बैठक में सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहेंगे और परियोजना के फायदे और नुकसान पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने कुमारस्वामी से आग्रह किया है कि वे स्वयं इस चर्चा में शामिल हों ताकि सभी पहलुओं को समझा जा सके और किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट राज्य सरकार की एक बड़ी शहरी विकास योजना है, जिसका उद्देश्य बेंगलुरु के आसपास के क्षेत्रों में सुव्यवस्थित शहरी विस्तार और बुनियादी ढांचे का विकास करना है। हालांकि, इस परियोजना को लेकर स्थानीय किसानों के बीच असंतोष और राजनीतिक बहस भी देखने को मिल रही है।

डिप्टी सीएम ने दोहराया कि सरकार किसानों के हितों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएगी और सभी निर्णय आपसी सहमति और बातचीत के आधार पर लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में पारदर्शिता और संवाद सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक नेता इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल दे रहे हैं, जबकि सरकार का ध्यान केवल विकास और किसानों के उचित मुआवजे पर है।

इस पूरे मामले ने कर्नाटक की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां एक ओर सरकार परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी नेता इस पर सवाल उठा रहे हैं।

फिलहाल सभी की नजर 26 तारीख को होने वाली प्रस्तावित बैठक पर टिकी है, जहां इस परियोजना पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है और आगे की दिशा तय की जा सकती है।

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