बेंगलुरु: रविवार को बसवनगुडी के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ वर्ल्ड कल्चर में, कन्नड़ के जाने-माने कवि और राज्योत्सव पुरस्कार विजेता बी.आर. लक्ष्मण राव ने अपने 80वें जन्मदिन के मौके पर अपनी कविताओं का संग्रह और अपनी आत्मकथा जारी की। डायरेक्टर और एक्टर टी.एस. नागाभरण और पत्रकार व लेखिका संध्या रानी ने इन किताबों का अनावरण किया।

जहाँ उनकी कविताओं का संग्रह 'हक्केगे बंदा हक्की' (अपने घोंसले में लौटा पक्षी) दशकों से कविता के साथ उनके जुड़ाव को दिखाता है, वहीं उनकी आत्मकथा 'अदृष्टवंथना आत्मकथे' (एक खुशकिस्मत आदमी की आत्मकथा) उनके निजी और साहित्यिक सफ़र और भाईचारे की कहानी बताती है। यह किताब उन अनुभवों की झलक देती है जिन्होंने अब तक उनके लेखन को आकार दिया है। राव, जो लगभग छह दशकों से कन्नड़ साहित्य से जुड़े हैं, रोमांटिसिज़्म, हास्य और व्यंग्य के मेल के साथ लिखते हैं।

नागाभरण ने कहा, "लोग अक्सर अपनी ज़िंदगी को पाठकों के लिए दिलचस्प बनाने के चक्कर में उसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। लेकिन यह आत्मकथा ज़मीन से जुड़ी हुई है और हर पाठक से जुड़ती है; यह उन्हें अलग-अलग दौर में ले जाती है और उनकी यादों को आँखों के सामने जीवंत अनुभव में बदल देती है।"

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