Karnataka : ऊर्जा क्षमता के बेहतर इस्तेमाल की जरूरत

Update: 2026-07-15 05:24 GMT

बेंगलुरु : कर्नाटक के शरावती वैली सैंक्चुअरी में प्रस्तावित पावर प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र सरकार की ओर से दिए गए जवाब के बाद अब एक नई रिपोर्ट सामने आई है। नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ (NBWL) की ओर से गठित कमेटी ने शरावती वैली सैंक्चुअरी क्षेत्र में पावर प्रोजेक्ट बनाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। वहीं, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (NIAS) के प्रोफेसर आर. श्रीकांत की रिपोर्ट में राज्य की अक्षय ऊर्जा क्षमता और उसके उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं।

केंद्र सरकार ने हाल ही में कर्नाटक हाई कोर्ट को बताया था कि शरावती वैली सैंक्चुअरी में प्रस्तावित पावर प्रोजेक्ट को NBWL की बनाई गई कमेटी ने मंजूरी नहीं दी है। यह जानकारी उस मामले की सुनवाई के दौरान दी गई, जिसमें पर्यावरण और वन क्षेत्र में किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के प्रभाव को लेकर सवाल उठाए गए थे।

शरावती वैली सैंक्चुअरी पश्चिमी घाट के महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्रों में शामिल है। यह क्षेत्र अपने घने जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जाना जाता है। पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से इस क्षेत्र में बड़े निर्माण और ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर चिंता जताते रहे हैं।

NBWL की कमेटी ने पर्यावरणीय प्रभावों को देखते हुए प्रस्तावित पावर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। कमेटी का उद्देश्य वन्यजीव क्षेत्रों और संरक्षित इलाकों में होने वाले विकास कार्यों का मूल्यांकन करना होता है, ताकि पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

इस बीच NIAS के प्रोफेसर आर. श्रीकांत की रिपोर्ट में कर्नाटक की ऊर्जा व्यवस्था को लेकर अलग मुद्दा उठाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य पीक रिन्यूएबल एनर्जी सीजन के दौरान तैयार होने वाली सोलर और विंड पावर का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन की क्षमता तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद कई बार अतिरिक्त बिजली का उपयोग नहीं हो पाता। इसका कारण ऊर्जा भंडारण की सीमित क्षमता, ट्रांसमिशन नेटवर्क की चुनौतियां और बिजली की मांग एवं आपूर्ति के बीच तालमेल की कमी बताई गई है।

प्रोफेसर श्रीकांत ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि राज्य को नई परियोजनाओं पर ध्यान देने के साथ-साथ मौजूदा अक्षय ऊर्जा संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की रणनीति बनानी चाहिए। ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ बिजली को स्टोर करने और जरूरत के समय इस्तेमाल करने की व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है।

कर्नाटक देश के प्रमुख अक्षय ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य में बड़ी मात्रा में सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन होता है। हालांकि, मौसम आधारित ऊर्जा स्रोतों में उत्पादन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। धूप और हवा की उपलब्धता के आधार पर बिजली उत्पादन में उतार-चढ़ाव आता है।

ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी स्टोरेज सिस्टम, बेहतर ग्रिड प्रबंधन और आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क विकसित करना जरूरी है। इससे अक्षय ऊर्जा का अधिकतम उपयोग किया जा सकता है और बिजली की बर्बादी को कम किया जा सकता है।

शरावती वैली प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरणविदों का कहना है कि पश्चिमी घाट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले पर्यावरणीय प्रभावों का गंभीर अध्ययन जरूरी है। उनका मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।

वहीं, ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का विस्तार आवश्यक है। लेकिन इसके लिए ऐसी जगहों का चयन करना होगा, जहां पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे।

कर्नाटक सरकार लगातार अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर जोर दे रही है। राज्य में सौर ऊर्जा पार्क, पवन ऊर्जा परियोजनाएं और हरित ऊर्जा से जुड़ी योजनाएं चल रही हैं। हालांकि, नई रिपोर्ट ने यह सवाल उठाया है कि उपलब्ध ऊर्जा क्षमता का बेहतर इस्तेमाल कैसे किया जाए।

हाई कोर्ट में चल रहे मामले के दौरान केंद्र सरकार की ओर से दिए गए जवाब और NIAS की रिपोर्ट ने दो अलग-अलग पहलुओं को सामने रखा है। एक ओर संरक्षित क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य में उपलब्ध स्वच्छ ऊर्जा संसाधनों के प्रभावी उपयोग की चुनौती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। शरावती वैली जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी परियोजना को लेकर फैसला इसी संतुलन को ध्यान में रखकर लेना होगा।

फिलहाल NBWL कमेटी द्वारा प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद शरावती वैली में पावर प्रोजेक्ट का रास्ता बंद हो गया है, जबकि NIAS की रिपोर्ट ने कर्नाटक में मौजूदा अक्षय ऊर्जा संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की जरूरत को रेखांकित किया है।

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