बेंगलुरु। कर्नाटक में पोल्ट्री पालन से जुड़े किसानों ने अपनी मांगों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। पोल्ट्री किसानों ने घोषणा की है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे 25 नवंबर से पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे। किसानों की प्रमुख मांग पोल्ट्री पालन की अंतरिम न्यूनतम लागत 10 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से लागू करने की है। इस आंदोलन का आह्वान कर्नाटक स्टेट पोल्ट्री फार्मर्स वेलफेयर एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन और ऑल कर्नाटक स्टेट पोल्ट्री फार्मर्स वेलफेयर एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से किया है। प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में लगभग 5,000 किसानों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई है। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर 'विधान सौधा चलो' प्रदर्शन करने का भी फैसला लिया है।

कर्नाटक के पोल्ट्री किसानों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा पोल्ट्री पालन की लागत लगभग 10 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किए जाने के बावजूद संबंधित इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट कंपनियां इस आदेश को लागू नहीं कर रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर किसानों में नाराजगी है। किसान संगठनों ने सरकार से निर्धारित दर को प्रभावी रूप से लागू कराने की मांग की है।

कर्नाटक स्टेट पोल्ट्री फार्मर्स वेलफेयर एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष यशवंत टी. ने बताया कि सरकार ने पोल्ट्री पालन की लागत लगभग 10 रुपये प्रति किलोग्राम तय की है। इसके बावजूद पोल्ट्री पालन से जुड़ी इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट कंपनियों द्वारा आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने इस स्थिति को किसानों की मांगों का प्रमुख कारण बताया।

यशवंत टी. के अनुसार, पोल्ट्री किसानों की मांग किसी नई दर को मनमाने तरीके से निर्धारित करने की नहीं, बल्कि सरकार द्वारा तय की गई लागत को लागू कराने की है। किसानों का कहना है कि जब सरकार ने लागत निर्धारित कर दी है, तो संबंधित कंपनियों को उसका पालन करना चाहिए।

इसी मांग को लेकर दोनों किसान संगठनों ने संयुक्त आंदोलन का निर्णय लिया है। संगठनों ने 25 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। इस दौरान राज्यभर के पोल्ट्री किसानों के आंदोलन में शामिल होने की संभावना जताई गई है।

प्रस्तावित आंदोलन की एक प्रमुख विशेषता 'विधान सौधा चलो' प्रदर्शन होगा। विधान सौधा कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में स्थित राज्य की प्रमुख प्रशासनिक इमारत है। किसान संगठनों ने अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस प्रदर्शन का फैसला किया है।

दोनों संगठनों के संयुक्त आह्वान से यह स्पष्ट है कि पोल्ट्री पालन की निर्धारित लागत का मुद्दा किसानों के बीच महत्वपूर्ण बन गया है। किसान चाहते हैं कि सरकार की ओर से तय की गई अंतरिम न्यूनतम लागत का पालन सुनिश्चित किया जाए।

कर्नाटक में पोल्ट्री पालन से जुड़े किसानों के लिए प्रति किलोग्राम लागत का निर्धारण महत्वपूर्ण आर्थिक विषय है। पोल्ट्री पालन में किसानों को उत्पादन से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। ऐसे में पालन की निर्धारित लागत का भुगतान और संबंधित शर्तों का पालन उनकी आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू है।

किसान संगठनों के अनुसार, सरकार ने लगभग 10 रुपये प्रति किलोग्राम की लागत निर्धारित की है। हालांकि, संगठनों का आरोप है कि इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट कंपनियों ने इसे लागू नहीं किया है। यही विवाद प्रस्तावित हड़ताल का मुख्य कारण बना है।

इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि किसानों ने आंदोलन के लिए 25 नवंबर की तारीख तय की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। इसका अर्थ है कि आंदोलन की समाप्ति के लिए फिलहाल कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।

किसान संगठनों की ओर से लगभग 5,000 किसानों के प्रदर्शन में शामिल होने की उम्मीद जताई गई है। इतनी बड़ी संख्या में किसानों की प्रस्तावित भागीदारी से यह आंदोलन राज्य स्तर पर ध्यान आकर्षित कर सकता है।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हड़ताल के दौरान पोल्ट्री पालन से जुड़ी कौन-कौन सी गतिविधियां प्रभावित होंगी। इसी तरह प्रदर्शन में शामिल होने वाले किसानों के जिलावार आंकड़े भी उपलब्ध नहीं हैं।

कर्नाटक स्टेट पोल्ट्री फार्मर्स वेलफेयर एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन और ऑल कर्नाटक स्टेट पोल्ट्री फार्मर्स वेलफेयर एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से आंदोलन का आह्वान किया है। दोनों संगठनों का उद्देश्य सरकार द्वारा निर्धारित अंतरिम न्यूनतम लागत को लागू कराने की मांग को प्रमुखता से उठाना है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष यशवंत टी. ने कंपनियों द्वारा सरकारी आदेश लागू नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया है। उनके बयान के अनुसार, सरकार की ओर से लागत तय होने के बावजूद किसानों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है। हालांकि, संबंधित कंपनियों के नाम और उनकी ओर से भुगतान की जा रही वर्तमान दरों का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।

किसान संगठनों ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि सरकारी आदेश किस तारीख को जारी किया गया था और उसमें किन शर्तों का उल्लेख है। उपलब्ध जानकारी में केवल लगभग 10 रुपये प्रति किलोग्राम की निर्धारित लागत और उसके लागू नहीं होने का दावा सामने आया है।

इसलिए फिलहाल विवाद का मुख्य आधार किसान संगठनों की ओर से दी गई जानकारी है। संबंधित इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट कंपनियों की प्रतिक्रिया उपलब्ध विवरण में शामिल नहीं है।

पोल्ट्री पालन से जुड़े किसानों के लिए उत्पादन लागत और भुगतान की व्यवस्था आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होती है। यदि किसानों की मांग के अनुसार निर्धारित दर लागू होती है, तो इससे उनके भुगतान संबंधी मुद्दे का समाधान निकल सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव सरकारी आदेश और उसके क्रियान्वयन की शर्तों पर निर्भर करेगा।

किसान संगठनों ने अपनी मांग को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन का रास्ता चुना है। 'विधान सौधा चलो' प्रदर्शन के माध्यम से वे इस मुद्दे को सरकार के सामने प्रमुखता से उठाना चाहते हैं।

प्रस्तावित प्रदर्शन में लगभग पांच हजार किसानों के शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि, प्रदर्शन का विस्तृत कार्यक्रम, किसानों के एकत्र होने का समय और आंदोलन की अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में अभी जानकारी नहीं दी गई है।

इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी, क्योंकि किसान संगठनों का कहना है कि जिस लागत को लागू कराने की मांग की जा रही है, वह पहले ही सरकार द्वारा निर्धारित की जा चुकी है। ऐसे में किसानों की अपेक्षा है कि संबंधित आदेश का पालन सुनिश्चित कराया जाए।

पोल्ट्री किसानों की नाराजगी का प्रमुख कारण निर्धारित लागत और उसके कथित गैर-अनुपालन के बीच का अंतर है। किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा लागत तय किए जाने के बाद भी कंपनियां उसे लागू नहीं कर रही हैं। इस कारण उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है।

दोनों संगठनों के संयुक्त फैसले से यह मुद्दा अब राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है। किसान संगठनों ने 25 नवंबर को आंदोलन शुरू करने की तारीख तय की है और अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है।

फिलहाल कर्नाटक के पोल्ट्री किसानों ने 25 नवंबर से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है। लगभग 5,000 किसानों के 'विधान सौधा चलो' प्रदर्शन में शामिल होने की उम्मीद है। किसान संगठनों की प्रमुख मांग सरकार द्वारा निर्धारित लगभग 10 रुपये प्रति किलोग्राम की अंतरिम न्यूनतम पोल्ट्री पालन लागत को लागू कराना है। एसोसिएशन के अध्यक्ष यशवंत टी. ने आरोप लगाया है कि संबंधित इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट कंपनियां सरकारी आदेश का पालन नहीं कर रही हैं। अब किसानों की मांगों पर होने वाली कार्रवाई और प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियों पर नजर रहेगी।

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