दशहरे में 2026 में नहीं हुआ ऐतिहासिक 'जट्टी कलाग', राजमाता प्रमोदा देवी वोडेयार का बड़ा बयान
मैसूर। कर्नाटक के ऐतिहासिक मैसूर दशहरा उत्सव में इस बार सदियों पुरानी परंपरा 'जट्टी कलाग' यानी वज्रमुष्टि कुश्ती प्रतियोगिता के रद्द होने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस बीच मैसूर राजपरिवार की राजमाता प्रमोदा देवी वोडेयार ने पहली बार इस मामले पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि इस पारंपरिक आयोजन के रद्द होने को किसी अपशकुन या अनहोनी से जोड़कर नहीं देखा जाए। राजमाता ने कहा कि जट्टी कलाग आयोजित नहीं होने से राज्य या देश को कोई नुकसान नहीं होगा। इसलिए किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका परिवार ज्योतिष में नहीं, बल्कि ईश्वर में विश्वास रखता है।
राजमाता ने शनिवार, 24 अक्टूबर को चामुंडी पहाड़ी पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि जट्टी कलाग रद्द होने के कारणों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। सभी संबंधित तथ्यों की जानकारी मिलने के बाद वह इस मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगी। उन्होंने लोगों से घटना को लेकर अनावश्यक आशंकाएं नहीं फैलाने की अपील की।
राजमाता बोलीं- हमें ईश्वर पर पूरा भरोसा
राजमाता प्रमोदा देवी वोडेयार ने कहा कि दशहरे की पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि कोई बड़ी अनहोनी होने वाली है।
उन्होंने कहा कि राजपरिवार ईश्वर में आस्था रखता है और धार्मिक परंपराओं का पालन करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी आयोजन के रद्द होने को देश के भविष्य से जोड़ दिया जाए।
राजमाता ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके परिवार में पूजा और धार्मिक अनुष्ठान ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के आधार पर नहीं किए जाते।
उन्होंने लोगों से कहा कि जट्टी कलाग के रद्द होने को लेकर तरह-तरह के अर्थ निकालने की आवश्यकता नहीं है।
राजमाता के इस बयान को आयोजन रद्द होने के बाद फैली चिंताओं को दूर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
विजयादशमी के दिन रद्द हुई ऐतिहासिक प्रतियोगिता
मैसूर दशहरा उत्सव के दौरान 21 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर राजमहल परिसर में पारंपरिक जट्टी कलाग आयोजित किया जाना था।
इस प्रतियोगिता में विशेष प्रकार की पारंपरिक कुश्ती का प्रदर्शन किया जाता है। आयोजन से पहले पहलवानों को धार्मिक अनुष्ठान और निर्धारित तैयारियां पूरी करनी होती हैं।
इस बार प्रतियोगिता सुबह नौ बजे शुरू होने वाली थी। हालांकि, प्रवेश व्यवस्था में देरी और सुरक्षा संबंधी पाबंदियों के कारण पहलवान समय पर आयोजन स्थल तक नहीं पहुंच सके।
इसके चलते प्रतियोगिता के लिए निर्धारित समय निकल गया और अंततः आयोजकों को कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।
घटना के बाद पहलवानों और सांस्कृतिक संगठनों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि बेहतर प्रशासनिक समन्वय होता तो प्रतियोगिता आयोजित की जा सकती थी।
पुलिस पर पहलवानों को रोकने का आरोप
जट्टी कलाग रद्द होने के बाद पारंपरिक कुश्ती से जुड़े पहलवानों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पहलवानों का आरोप है कि उनके पास मैसूर राजपरिवार द्वारा जारी वैध प्रवेश पास मौजूद थे। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें महल परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया।
बेंगलुरु गरडी जट्टी एसोसिएशन के अध्यक्ष जगन्नाथ ए. जट्टी ने कहा कि प्रतियोगिता शुरू होने से पहले करीब डेढ़ घंटे तक तैयारी और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
उनके अनुसार, प्रवेश में देरी होने के कारण पहलवान निर्धारित समय पर तैयारी पूरी नहीं कर सके।
कुछ पहलवानों ने पुलिसकर्मियों पर अनुचित व्यवहार और पैसे मांगने जैसे आरोप भी लगाए हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होना अभी बाकी है।
राजमाता ने मांगी पूरी घटना की रिपोर्ट
प्रमोदा देवी वोडेयार ने कहा कि उन्हें जट्टी कलाग रद्द होने से संबंधित कुछ जानकारियां मिली हैं, लेकिन वह सभी तथ्यों को समझने के बाद ही विस्तृत प्रतिक्रिया देंगी।
उन्होंने बताया कि घटना के बारे में संबंधित लोगों से रिपोर्ट मंगाई जा रही है।
राजमाता के अनुसार, मैसूर राजपरिवार की धार्मिक परंपराओं में प्रत्येक अनुष्ठान के लिए निर्धारित समय का विशेष महत्व होता है।
उन्होंने बताया कि विजय यात्रा का समय होने के कारण राजपरिवार को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ना पड़ा।
राजमाता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस संबंध में किसी ज्योतिषी से सलाह नहीं ली थी। उन्होंने कहा कि राजपरिवार ने अपनी आस्था ईश्वर पर रखी है और आयोजन रद्द होने से वह चिंतित नहीं हैं।
राजपरिवार ने क्यों निकाली विजय यात्रा?
मैसूर दशहरा उत्सव में राजपरिवार की विजय यात्रा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।
परंपरा के अनुसार, विजयादशमी के दिन राजपरिवार द्वारा निर्धारित समय पर धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
इस वर्ष जट्टी कलाग के लिए तय समय में प्रतियोगिता शुरू नहीं हो सकी। दूसरी ओर, विजय यात्रा का समय नजदीक आ गया था।
ऐसे में राजपरिवार ने विजय यात्रा को प्राथमिकता देते हुए तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ने का फैसला किया।
मैसूर राजपरिवार के सदस्य और सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वोडेयार ने भी कहा कि विजय यात्रा का समय होने के कारण उन्हें आगे बढ़ना पड़ा।
उन्होंने बताया कि जट्टी कलाग रद्द होने के वास्तविक कारणों की पूरी जानकारी उन्हें भी नहीं मिली है। रिपोर्ट मिलने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
क्या है जट्टी कलाग की सदियों पुरानी परंपरा?
जट्टी कलाग को वज्रमुष्टि कलाग भी कहा जाता है। यह मैसूर दशहरा उत्सव से जुड़ी पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिता है।
इसमें विशेष रूप से प्रशिक्षित पहलवान हिस्सा लेते हैं। प्रतियोगिता के दौरान पहलवान हाथ में एक पारंपरिक उपकरण पहनते हैं, जिसे वज्रमुष्टि कहा जाता है।
इस कुश्ती में शारीरिक कौशल, अनुशासन और पारंपरिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाता है।
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, मैसूर में इस प्रकार की कुश्ती का संबंध कई सदियों पुरानी परंपराओं से है।
वोडेयार राजवंश के शासनकाल में इस प्रतियोगिता को विशेष संरक्षण मिला था। बाद में यह दशहरा उत्सव के महत्वपूर्ण पारंपरिक आयोजनों में शामिल हो गई।
प्रतियोगिता से पहले पहलवान धार्मिक व्रत, पूजा और अन्य अनुष्ठान करते हैं।
पहले भी रद्द हो चुकी है प्रतियोगिता
हालांकि, इस वर्ष जट्टी कलाग रद्द होने को अभूतपूर्व घटना बताया जा रहा है, लेकिन ऐतिहासिक रिकॉर्ड में पहले भी प्रतियोगिता स्थगित होने के उदाहरण मिलते हैं।
वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के कारण मैसूर दशहरा सीमित रूप में आयोजित किया गया था। उस समय संक्रमण के खतरे को देखते हुए वज्रमुष्टि प्रतियोगिता रद्द कर दी गई थी।
राजमाता प्रमोदा देवी वोडेयार ने तब पहलवानों और संबंधित संगठनों से बातचीत करके आयोजन नहीं करने का अनुरोध किया था।
इसी तरह वर्ष 2018 में राजमाता की मां के निधन के बाद दशहरे से जुड़े कुछ निजी धार्मिक अनुष्ठान रद्द किए गए थे।
इसलिए वर्तमान विवाद का मुख्य मुद्दा केवल प्रतियोगिता का रद्द होना नहीं, बल्कि सुरक्षा और प्रवेश व्यवस्था में कथित अव्यवस्था के कारण उसका आयोजित नहीं हो पाना है।
जंबू सवारी को लेकर भी बोलीं राजमाता
राजमाता प्रमोदा देवी वोडेयार ने दशहरा उत्सव की प्रसिद्ध जंबू सवारी के बारे में भी अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि इस बार स्वर्ण अंबारी उठाने वाले हाथी प्रशांत को लेकर उन्हें शुरुआत में कुछ चिंता थी।
राजमाता के अनुसार, वह जानना चाहती थीं कि हाथी स्वर्ण अंबारी को किस तरह संभालेगा और यात्रा के दौरान उसका प्रदर्शन कैसा रहेगा।
हालांकि, प्रशांत ने सफलतापूर्वक अपनी जिम्मेदारी निभाई। इससे राजमाता ने प्रसन्नता व्यक्त की।
उन्होंने देवी चामुंडेश्वरी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उत्सव का यह महत्वपूर्ण हिस्सा सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
मैसूर दशहरा की ऐतिहासिक जट्टी कलाग प्रतियोगिता रद्द होने के बाद प्रशासनिक तैयारियों और पुलिस व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पहलवानों ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत करने की बात कही है। उनका आरोप है कि समय पर प्रवेश नहीं मिलने से सदियों पुरानी परंपरा प्रभावित हुई।
दूसरी ओर, राजमाता प्रमोदा देवी वोडेयार ने लोगों से अपील की है कि इस घटना को अपशकुन या किसी संभावित संकट से जोड़कर न देखा जाए।
फिलहाल राजपरिवार घटना की विस्तृत जानकारी जुटा रहा है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि आयोजन रद्द होने के लिए कौन-सी परिस्थितियां जिम्मेदार थीं और भविष्य में ऐसी अव्यवस्था रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।