GBA अधिकारियों पर साइबर ठगी की कोशिश, WhatsApp से नाम लेकर फ्रॉड का मामला
Karnataka कर्नाटक: ग्रेटर बैंगलोर अथॉरिटी (GBA) के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर WhatsApp के जरिए बड़े स्तर पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। शहर में सक्रिय एक संगठित साइबर फ्रॉड गैंग द्वारा अधिकारियों की तस्वीरों और नामों का दुरुपयोग कर नकली अकाउंट बनाए गए और इनके जरिए पैसे की मांग की जा रही थी। इस घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है।
अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह ने GBA के चीफ कमिश्नर महेश्वर राव सहित कई वरिष्ठ नगर निगम आयुक्तों की तस्वीरों का इस्तेमाल कर फर्जी प्रोफाइल तैयार किए। इन नकली अकाउंट्स के जरिए उन स्टाफ सदस्यों और संपर्क में रहने वाले लोगों को मैसेज भेजे गए, जिनमें वित्तीय सहायता या व्यक्तिगत जानकारी की मांग की गई थी।
जांच में सामने आया है कि ठगों ने ईस्ट सिटी कमिश्नर डी.एस. रमेश, नॉर्थ सिटी कमिश्नर पोम्माला सुनील कुमार, साउथ सिटी कमिश्नर के.एन. रमेश और सेंट्रल सिटी कमिश्नर राजेंद्र चोलन की तस्वीरों का उपयोग प्रोफाइल पिक्चर (DP) के रूप में किया। इन नामों का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की गई।
साइबर ठगों ने भारतीय और विदेशी दोनों तरह के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया, जिनमें +91 7631678095 और +62 815580651 जैसे नंबर शामिल हैं। इन नंबरों से भेजे गए संदेशों में “Financial help चाहिए”, “Urgent need” जैसे शब्दों का उपयोग किया गया, जिससे संदेश को वास्तविक और गंभीर दिखाने की कोशिश की गई।
कुछ मामलों में ठगों ने केवल पैसे की मांग ही नहीं की, बल्कि बैंक अकाउंट डिटेल्स और अन्य निजी जानकारी भी मांगी। कई लोगों को यह संदेश असली अधिकारियों के नाम से आने के कारण शुरू में विश्वास हो गया, लेकिन कुछ कर्मचारियों को संदेह होने पर उन्होंने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।
इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत दर्ज कराई गई और साइबर क्राइम सेल को जांच के लिए अलर्ट किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि GBA के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा इस तरह WhatsApp पर पैसे या निजी जानकारी नहीं मांगी जाती है।
इस घटना के बाद प्रशासन ने कर्मचारियों और आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और कहा है कि किसी भी संदिग्ध संदेश पर भरोसा न करें। साथ ही लोगों को यह भी निर्देश दिया गया है कि ऐसे किसी भी नंबर या अकाउंट से संपर्क होने पर तुरंत इसकी सूचना साइबर सेल को दें।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है। फर्जी प्रोफाइल और डीपफेक जैसी तकनीकों के जरिए लोगों को धोखा देना आसान हो गया है, इसलिए सावधानी बेहद जरूरी है।
फिलहाल पुलिस और साइबर क्राइम विभाग इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटे हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।