कर्नाटक में बाढ़ और सूखे का संकट, JDS की टीमें प्रभावित इलाकों का करेंगी दौरा

Update: 2026-07-12 11:24 GMT

बेंगलुरु : कर्नाटक में इस साल मानसून की अनियमितता ने एक ओर जहां कई इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है, वहीं दूसरी ओर कई जिलों में कम बारिश के कारण सूखे का खतरा भी बढ़ गया है। राज्य के कई हिस्सों में किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। कहीं खेत बाढ़ के पानी में डूब गए हैं तो कहीं बारिश की कमी से फसलें प्रभावित हो रही हैं।

जानकारी के मुताबिक, मानसून में असमान बारिश के कारण राज्य में कई जगहों पर सामान्य से 40 से 43 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। इससे विशेष रूप से उन जिलों के किसानों की चिंता बढ़ गई है, जहां पर्याप्त बारिश नहीं होने से बुवाई और कृषि गतिविधियों पर असर पड़ा है।

किसानों की समस्याओं और जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए जनता दल (सेक्युलर) यानी JDS ने विशेष अध्ययन टीमें गठित की हैं। पार्टी की ये टीमें राज्य के बाढ़ और सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगी और किसानों की समस्याओं को समझेंगी।

JDS के अनुसार, पार्टी प्रमुख और केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के मार्गदर्शन में इन विशेष टीमों का गठन किया गया है। टीमों का उद्देश्य प्रभावित इलाकों में जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करना, किसानों से सीधे बातचीत करना और उनकी समस्याओं को सरकार के सामने रखना है।

युवा जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि वह खुद 13 से 15 जुलाई तक राज्य के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे। उनके दौरे में मुख्य रूप से विजयपुरा और बागलकोट जिले शामिल हैं।

निखिल कुमारस्वामी के कार्यक्रम के अनुसार, वह 14 जुलाई को विजयपुरा जिले के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे। इस दौरान वह किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं की जानकारी लेंगे और बाद में मीडिया को भी संबोधित करेंगे।

इसके बाद 15 जुलाई को वह बागलकोट जिले के बादामी क्षेत्र का दौरा करेंगे। यहां वह प्रभावित किसानों और ग्रामीणों से बातचीत करेंगे तथा बारिश की कमी से पैदा हुई परिस्थितियों की जानकारी जुटाएंगे।

JDS नेता ने कहा कि पार्टी की अध्ययन टीमें केवल औपचारिक दौरा नहीं करेंगी, बल्कि प्रभावित परिवारों से सीधे संपर्क कर उनकी परेशानियों को समझेंगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ और सूखे दोनों परिस्थितियों से जूझ रहे किसानों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा।

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पार्टी तब तक संघर्ष करेगी, जब तक किसानों को उनका उचित मुआवजा नहीं मिल जाता। उन्होंने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से किसानों को समय पर राहत उपलब्ध कराने की मांग की।

कर्नाटक में इस बार मौसम की स्थिति ने कृषि क्षेत्र के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जहां कुछ जिलों में लगातार बारिश से फसलें और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, वहीं कई इलाकों में बारिश की कमी के कारण किसान परेशान हैं।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर और पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। बारिश की कमी लंबे समय तक जारी रहने पर पेयजल और सिंचाई से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

वहीं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को फसल नुकसान, पशुधन की हानि और खेतों को हुए नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती है कि वह दोनों तरह की प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाए।

JDS का कहना है कि पार्टी जमीनी स्तर पर किसानों की समस्याओं का अध्ययन कर सरकार के सामने ठोस मांगें रखेगी। पार्टी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

राज्य में बाढ़ और सूखे की स्थिति को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। विपक्षी दल लगातार सरकार से प्रभावित किसानों के लिए राहत पैकेज और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

अब JDS की अध्ययन टीमों के दौरे के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट पर सभी की नजरें रहेंगी। माना जा रहा है कि इन दौरों के जरिए पार्टी किसानों से जुड़े मुद्दों को आने वाले दिनों में और मजबूती से उठाएगी।

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