Karnataka कर्नाटक: उप-मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, जो बेंगलुरु शहरी विकास मंत्री भी हैं, ने कहा है कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अंतर्गत आने वाले निगम क्षेत्रों में अब तक 23 लाख से अधिक संपत्तियों के लिए ई-खाता जारी किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इस डिजिटल पहल के तहत संपत्ति से जुड़ी जानकारी नागरिकों के मोबाइल फोन पर ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई है। यह जानकारी उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी, जिसमें उन्होंने ई-खाता कार्यक्रम की प्रगति और आगामी योजनाओं पर विस्तार से बात की।
डी.के. शिवकुमार ने कहा कि ई-खाता कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों को उनकी भूमि और संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध कराकर पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस प्रणाली में संपत्ति का विवरण, नक्शा, देशांतर-अक्षांश की जानकारी और तस्वीरें शामिल होती हैं, जिससे फर्जीवाड़ा और जालसाजी की संभावना कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 महीनों में 23 लाख से अधिक संपत्तियों के लिए ई-खाता तैयार किया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ प्रशासनिक कारणों से ‘नम्मा ई-खाता’ अभियान शुरू नहीं हो पाया था, क्योंकि नगर निगम के कर्मचारी जनगणना के मकान सूचीकरण कार्य में व्यस्त थे। यह कार्य 15 मई को पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद 16 मई से हर शनिवार को यह अभियान चलाया जाएगा।
सरकार ने निर्णय लिया है कि भीड़ से बचने के लिए यह अभियान नगर निगम कार्यालयों में नहीं, बल्कि निजी स्कूलों में विशेष केंद्र बनाकर चलाया जाएगा। कुल मिलाकर सभी पांच नगर पालिकाओं के क्षेत्र में लगभग 50 ओपन हाउस काउंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां नागरिक अपनी संपत्ति से संबंधित कार्य करा सकेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि ‘A’ खाते से जुड़े 7,000 आवेदनों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिनके भुगतान के बाद संबंधित लोगों को ‘A’ खाता प्रदान किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया से लगभग 300 करोड़ रुपये के राजस्व की उम्मीद है।
शुल्क को लेकर उठे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सभी सेवाएं मुफ्त में उपलब्ध कराना संभव नहीं है, क्योंकि संपत्ति की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले जिन संपत्तियों की कीमतें हजारों में थीं, वे अब करोड़ों में पहुंच चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में मुआवजे और टाउनशिप परियोजनाओं को लेकर सरकार किसानों को बेहतर विकल्प देने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी जमीन बेचने से पहले सोच-समझकर निर्णय लें और किसी के प्रभाव या मध्यस्थों के बहकावे में न आएं। साथ ही उन्होंने राजनीतिक आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं को लेकर गलत बयानबाजी की जा रही है, जबकि वास्तविकता जमीन पर स्पष्ट है।