बेंगलुरु: प्रवर्तन निदेशालय (ED), बेंगलुरु ज़ोनल ऑफिस ने 21 और 29 मई को दीपक केबल्स (इंडिया) लिमिटेड (DCIL) से जुड़े लोगों और संस्थाओं के अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी ली। यह तलाशी बैंकों के एक समूह के साथ 899.35 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले के सिलसिले में की गई थी।
तलाशी अभियान के दौरान, DCIL, DCIL के निदेशक के. वेंकटेश्वर राव, आधुनिक कॉर्पोरेशन लिमिटेड के निदेशक महेश अग्रवाल (कोलकाता) और अन्य से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज़ PMLA, 2002 के प्रावधानों के तहत ज़ब्त किए गए। ED ने 1.27 करोड़ रुपये का सोना (गहने) और नकद ज़ब्त किया, और 18 करोड़ रुपये के कुल मूल्य वाले विभिन्न बैंक खातों को अस्थायी रूप से फ्रीज़ कर दिया।
ED ने यह जाँच CBI द्वारा DCIL और उसके निदेशक के. वेंकटेश्वर राव तथा अन्य के खिलाफ दर्ज की गई एक FIR के आधार पर शुरू की थी। इन पर आरोप है कि इन्होंने SBI के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह से बड़ी मात्रा में ऋण सुविधाएँ प्राप्त करके और ऋण की राशि को गलत मदों में खर्च करके बैंकों के साथ धोखाधड़ी की। आरोप है कि कंपनी ने बैंक ऋण प्राप्त करने और उन्हें जारी रखने के लिए झूठे वित्तीय विवरण प्रस्तुत किए और खातों की किताबों में हेरफेर किया।
जाँच में पता चला कि आरोपियों ने काल्पनिक बिक्री और खरीद, सर्कुलर ट्रेडिंग और नकली कॉर्पोरेट गारंटी जारी करने के लिए कई संस्थाओं का इस्तेमाल किया। इन लेन-देनों का उपयोग कृत्रिम रूप से टर्नओवर बढ़ाने, बैंकों से ऋण लेने की क्षमता (ड्राइंग पावर) बढ़ाने, मौजूदा ऋणों को लगातार जारी रखने (एवरग्रीन करने) और अपराध से अर्जित धन को संबंधित कंपनियों और निजी खातों के माध्यम से गलत मदों में खर्च करने के लिए किया गया, ताकि इस अवैध धन के मूल स्रोत को छिपाया जा सके।