CM शिवकुमार ने अपार्टमेंट बिल पर मांगे सुझाव

Update: 2026-07-15 08:44 GMT

बेंगलुरु : कर्नाटक सरकार राज्य में अपार्टमेंट मालिकों के अधिकारों को कानूनी रूप से अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बुधवार को कर्नाटक अपार्टमेंट (ओनरशिप एंड मैनेजमेंट) बिल-2026 को लेकर अपार्टमेंट मालिकों, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के प्रतिनिधियों तथा अन्य संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी कानून को जल्दबाजी में लागू नहीं करेगी और सभी हितधारकों की राय लेने के बाद ही अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अपार्टमेंट मालिकों की चिंताओं को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि सरकार का उद्देश्य ऐसा व्यापक और संतुलित कानून बनाना है, जो अपार्टमेंट खरीदारों के अधिकारों की पूरी तरह रक्षा करे तथा भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों को कम करने में मददगार साबित हो।

डी.के. शिवकुमार ने कहा कि जब कोई व्यक्ति किसी अपार्टमेंट या संपत्ति को खरीदता है और उसका स्वामित्व उसे सौंप दिया जाता है, तो उस पर उसका पूर्ण अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा, "जब प्रॉपर्टी आपको सौंपी जाती है, तो उस पर आपका पूरा मालिकाना हक होना चाहिए। आप उस संपत्ति के वास्तविक मालिक हैं और सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आपके अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहें।"

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कर्नाटक अपार्टमेंट (ओनरशिप एंड मैनेजमेंट) बिल-2026 को अंतिम रूप देने से पहले व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अपार्टमेंट एसोसिएशनों, बिल्डरों, कानूनी विशेषज्ञों, शहरी विकास से जुड़े जानकारों और विभिन्न राजनीतिक दलों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए ही बिल का अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर पूरी गंभीरता के साथ काम कर रही है, लेकिन किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करेगी। उनका कहना था कि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले पर्याप्त समय उपलब्ध है और इसी दौरान सभी पक्षों से सुझाव लेकर बिल में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधेयक पहले राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि सरकार किसी भी कानून को बिना पर्याप्त चर्चा और सहमति के पारित नहीं करना चाहती।

डी.के. शिवकुमार ने कहा, "मैं कोई भी विधेयक जबरदस्ती पारित नहीं करना चाहता। हम सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करेंगे और जो भी अच्छे सुझाव मिलेंगे, उन्हें बिल में शामिल किया जाएगा। हमारा उद्देश्य ऐसा कानून बनाना है, जो लंबे समय तक प्रभावी रहे और लोगों का विश्वास जीत सके।"

बैठक में शामिल अपार्टमेंट मालिकों और रेजिडेंट्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी अपनी विभिन्न चिंताओं और सुझावों को मुख्यमंत्री के सामने रखा। उन्होंने अपार्टमेंट परिसरों के रखरखाव, साझा सुविधाओं के प्रबंधन, बिल्डरों की जवाबदेही, स्वामित्व अधिकारों की स्पष्टता और विवाद समाधान की प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की मांग की।

कई प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई बार अपार्टमेंट खरीदारों को बिल्डरों और प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में स्पष्ट कानूनी प्रावधान होने से विवादों का समाधान अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित कानून संतुलित और व्यावहारिक रूप में लागू किया जाता है, तो इससे राज्य में लाखों अपार्टमेंट मालिकों को लाभ मिलेगा। साथ ही रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आ सकती है।

शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते अपार्टमेंट कल्चर को देखते हुए इस तरह के कानून की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। विशेष रूप से बेंगलुरु जैसे महानगरों में बड़ी संख्या में लोग अपार्टमेंट में रहते हैं और उन्हें स्वामित्व, रखरखाव तथा प्रबंधन से जुड़े कई व्यावहारिक मुद्दों का सामना करना पड़ता है।

सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून केवल अपार्टमेंट मालिकों के अधिकारों की रक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अपार्टमेंट प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

फिलहाल कर्नाटक अपार्टमेंट (ओनरशिप एंड मैनेजमेंट) बिल-2026 का मसौदा विचाराधीन है। सरकार विभिन्न पक्षों से सुझाव लेने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद इसे अंतिम रूप देगी। इसके बाद मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने पर विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। राज्य सरकार का दावा है कि यह कानून अपार्टमेंट मालिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ शहरी आवास व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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