बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को माता अमृतानंदमयी की आध्यात्मिक और सामाजिक सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि देश में न्याय, नैतिकता, धर्म और सेवा की भावना को जीवित रखने में महान संतों और आध्यात्मिक गुरुओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि माता अमृतानंदमयी जैसी महान विभूतियां समाज को प्रेम, करुणा, मानवता और निस्वार्थ सेवा का संदेश देती हैं। मुख्यमंत्री बेंगलुरु स्थित माता अमृतानंदमयी मठ में आयोजित ब्रह्मस्थानम मंदिर उत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवकुमार ने माता अमृतानंदमयी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जैसे संतों के कारण ही समाज में नैतिक मूल्यों और मानव सेवा की परंपरा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने का भी संदेश देती है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद तमिलनाडु के कन्याकुमारी पहुंचे थे और उन्होंने विश्व कल्याण के लिए तपस्या की थी। उसी प्रकार माता अमृतानंदमयी मानवता और कर्नाटक के लोगों के कल्याण के लिए केरल से यहां आई हैं। उन्होंने माता अमृतानंदमयी के आगमन को कर्नाटक के श्रद्धालुओं के लिए सौभाग्यपूर्ण अवसर बताया।
शिवकुमार ने कहा, "माता अमृतानंदमयी मानवता और कर्नाटक के लोगों के कल्याण के लिए भगवान की भूमि केरल से यहां आई हैं और हमें उनके दर्शन करने का अवसर मिला है। सभी कन्नड़वासियों की ओर से मैं उनका हार्दिक स्वागत करता हूं और उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा ने हमेशा विश्व को शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश दिया है। देश के संतों और आध्यात्मिक गुरुओं ने समाज को एकजुट रखने तथा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने माता अमृतानंदमयी की सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन लोगों के दुख-दर्द को समझने और जरूरतमंदों की सहायता करने की प्रेरणा देता है। समाज में प्रेम और करुणा की भावना बढ़ाना किसी भी आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण उद्देश्य होता है।
बेंगलुरु में आयोजित ब्रह्मस्थानम मंदिर महोत्सव माता अमृतानंदमयी की भारत यात्रा 2026 का हिस्सा है। मठ की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु में यह आयोजन 6 और 7 नवंबर को निर्धारित है। कार्यक्रम में सत्संग, भजन, ध्यान और माता अमृतानंदमयी के व्यक्तिगत दर्शन की व्यवस्था रखी गई है। इसके अलावा पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजन का हिस्सा हैं।
माता अमृतानंदमयी को उनके अनुयायी श्रद्धापूर्वक 'अम्मा' के नाम से संबोधित करते हैं। वह विश्वभर में प्रेम, करुणा और मानव सेवा के संदेश के लिए जानी जाती हैं। उनके आध्यात्मिक कार्यक्रमों में विभिन्न आयु वर्ग और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग भाग लेते हैं।
माता अमृतानंदमयी मठ के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सहायता और अन्य मानवीय गतिविधियों का संचालन किया जाता है। मठ की विभिन्न पहलें आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद समुदायों की सहायता पर केंद्रित रही हैं।
माता अमृतानंदमयी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, उनकी आध्यात्मिक यात्रा और मानवीय कार्यों का मूल उद्देश्य प्रेम तथा सेवा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। उनके कार्यक्रमों में ध्यान, आध्यात्मिक संवाद और व्यक्तिगत दर्शन को विशेष महत्व दिया जाता है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने भी अपने संबोधन में इसी भावना को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महान संतों का योगदान केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज में नैतिकता और सेवा के मूल्यों को बनाए रखने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचारों का उल्लेख करते हुए आध्यात्मिकता तथा मानव कल्याण के बीच संबंध पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संत परंपरा ने हमेशा लोगों को व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर समाज के कल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा दी है।
शिवकुमार का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब समाज में आध्यात्मिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर लगातार चर्चा होती रहती है। शिक्षा, चिकित्सा सहायता, आपदा राहत और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में विभिन्न धार्मिक संस्थाएं भी सक्रिय रही हैं।
ब्रह्मस्थानम महोत्सव का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चिंतन, ध्यान और धार्मिक परंपराओं से जोड़ना है। आयोजन के दौरान माता अमृतानंदमयी के सत्संग और भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया जाता है।
मठ के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, बेंगलुरु में दोनों दिन सुबह 11 बजे से आयोजन की गतिविधियां निर्धारित की गई हैं। श्रद्धालुओं के लिए व्यक्तिगत दर्शन की व्यवस्था भी की गई है। दर्शन के लिए निशुल्क टोकन उपलब्ध कराने की जानकारी आयोजकों ने दी है।
भारत यात्रा के अंतर्गत माता अमृतानंदमयी इससे पहले मैसूरु में आयोजित ब्रह्मस्थानम महोत्सव में भी शामिल हुई थीं। वहां 2 और 3 नवंबर को आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इसके बाद वह बेंगलुरु पहुंचीं। मठ के कार्यक्रम संबंधी अपडेट के अनुसार, माता अमृतानंदमयी 4 नवंबर की शाम बेंगलुरु पहुंची थीं।
बेंगलुरु के बाद उनकी यात्रा में हैदराबाद, पुणे, मुंबई, अहमदाबाद, दिल्ली और अन्य शहरों के कार्यक्रम भी निर्धारित हैं। इन आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को सत्संग और आध्यात्मिक संवाद का अवसर प्रदान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का माता अमृतानंदमयी के प्रति सम्मान व्यक्त करना आध्यात्मिक और सामाजिक मूल्यों के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने अपने संबोधन के माध्यम से इस बात पर जोर दिया कि समाज में न्याय, नैतिकता, धर्म और सेवा की भावना बनाए रखने के लिए महान संतों और आध्यात्मिक विभूतियों का योगदान महत्वपूर्ण है।
ब्रह्मस्थानम मंदिर महोत्सव के उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री ने माता अमृतानंदमयी का कर्नाटक की जनता की ओर से स्वागत किया और उनके मानव कल्याण के प्रयासों के प्रति आभार जताया। यह आयोजन आध्यात्मिक चिंतन और सेवा के संदेश के साथ श्रद्धालुओं को जोड़ने का अवसर बन रहा है।