बेंगलुरु। कर्नाटक में गन्ना किसानों की समस्याओं और उनकी मांगों को लेकर जारी आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गन्ना किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उन्हें पूरा भरोसा है कि केंद्र सरकार के सहयोग से किसानों को राहत मिलेगी। बेंगलुरु स्थित विधान सौधा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि वह किसानों की समस्याओं पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं करना चाहते। उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की भूमिका का भी जिक्र किया और कहा कि सभी राजनीतिक दलों को आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर किसानों के हित में मिलकर काम करना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर मांगी मदद

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 19 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गन्ना किसानों की मांगों पर तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा, "मैंने गन्ना किसानों के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। मुझे पूरा भरोसा है कि इससे उन्हें फायदा होगा।"

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर कर्नाटक के विभिन्न क्षेत्रों में गन्ना किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन के कारण गन्ने की पेराई का सीजन शुरू होने में देरी हो रही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि केंद्र सरकार किसानों और चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों पर जल्द निर्णय ले, ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

किसानों के मुद्दे पर राजनीति नहीं करना चाहता

विधान सौधा में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि उनकी प्राथमिकता किसानों की परेशानियों का समाधान करना है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय समाधान निकालना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करना चाहता। आप किसानों के साथ राजनीति क्यों करते हैं? कुछ और लोग भी हैं जो राजनीति करते हैं। उन्हें करने दीजिए, आलोचना करने दीजिए। हमें इसकी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है और उनका समाधान निकालने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी पर भी साधा निशाना

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भी गन्ना किसानों की समस्याओं को सुलझाने का प्रयास किया है।

हालांकि शिवकुमार ने आरोप लगाया कि आखिर में केंद्रीय मंत्री ने फिर से कांग्रेस पर ही दोष मढ़ दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अब केंद्र सरकार के खिलाफ बयानबाजी नहीं करना चाहते। किसानों की समस्याएं किसी एक राजनीतिक दल से जुड़ी नहीं हैं और उनके समाधान के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए।

दूसरी ओर, प्रह्लाद जोशी ने भी गन्ना किसानों की शिकायतों को लेकर राज्य सरकार को पत्र लिखा है। उन्होंने चीनी मिलों में गन्ने की तौल और शुगर रिकवरी की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताई है।

गन्ने की कीमत बढ़ाने की मांग पर आंदोलन

उत्तर कर्नाटक के कई जिलों में गन्ना किसान अपनी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

किसानों की प्रमुख मांगों में चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाना, गन्ने का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना और इथेनॉल की खरीद से संबंधित नीतियों में बदलाव शामिल हैं।

किसान संगठनों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुरूप आय नहीं बढ़ने से आर्थिक परेशानियां पैदा हो रही हैं।

कई स्थानों पर किसानों ने प्रदर्शन और पदयात्राएं आयोजित की हैं। कुछ किसान संगठनों ने हुबली में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास के घेराव की भी योजना बनाई थी।

हालांकि कानून-व्यवस्था से संबंधित परिस्थितियों को देखते हुए अदालत की ओर से इस प्रस्तावित प्रदर्शन पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए थे।

पेराई सीजन में देरी से किसानों को नुकसान की आशंका

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में बताया कि किसानों के आंदोलन के कारण उत्तर कर्नाटक में गन्ने की पेराई का सीजन प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि खेतों में तैयार गन्ने की कटाई और पेराई में अधिक देरी होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

समय पर पेराई नहीं होने से गन्ने के वजन और उसमें मौजूद शर्करा की मात्रा में गिरावट आ सकती है। इससे किसानों को मिलने वाले भुगतान पर असर पड़ सकता है।

इसी कारण मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है।

चीनी और इथेनॉल की कीमतों पर निर्णय जरूरी

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में केंद्र सरकार से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन करने का आग्रह किया है।

उन्होंने घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए चीनी के अलग-अलग न्यूनतम बिक्री मूल्य निर्धारित करने की मांग भी उठाई।

इसके अलावा गन्ने से तैयार होने वाले इथेनॉल की खरीद कीमत बढ़ाने और वर्तमान खरीद नीतियों की समीक्षा करने का अनुरोध किया है।

मुख्यमंत्री का मानना है कि इन निर्णयों से चीनी उद्योग की वित्तीय स्थिति में सुधार हो सकता है, जिससे किसानों को समय पर और उचित भुगतान करने में मदद मिलेगी।

राज्य सरकार ने गिनाए किसानों के लिए उठाए कदम

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में बताया कि राज्य सरकार ने चीनी मिलों में गन्ने की तौल और शुगर रिकवरी की जांच को पारदर्शी बनाने के लिए कई उपाय किए हैं।

सरकार के अनुसार, राज्य की सभी 81 संचालित चीनी मिलों में पारंपरिक तौल व्यवस्था के स्थान पर डिजिटल लोड सेल लगाए गए हैं।

इसके अलावा जिला स्तर पर निरीक्षण टीमों का गठन किया गया है, जो मिलों में गन्ने की तौल और चीनी की रिकवरी की जांच करती हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में औसत शुगर रिकवरी वर्ष 2022-23 के 9.91 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 11.09 प्रतिशत हो गई है।

सरकार ने पिछले पेराई सीजन में किसानों के लिए अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था भी की थी।

किसानों से आंदोलन समाप्त करने की अपील

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने 17 अक्टूबर को बेलगावी जिले के कित्तूर में आंदोलनरत किसानों से मुलाकात की थी।

इस दौरान उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और आंदोलन समाप्त कर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।

उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की परेशानियां केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी किसान ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार चीनी मिल संचालकों और संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत कर उचित समाधान निकालने का प्रयास करेगी।

केंद्र और राज्य के सहयोग से समाधान की उम्मीद

गन्ना किसानों की मांगों को लेकर केंद्र और कर्नाटक सरकार के बीच बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि वह विपक्षी नेताओं को भी साथ लेकर प्रधानमंत्री से मुलाकात करने के पक्ष में हैं।

उनका कहना है कि किसानों का हित सर्वोपरि होना चाहिए और इस विषय पर सभी राजनीतिक दलों को सहयोग करना चाहिए।

फिलहाल प्रधानमंत्री को पत्र भेजे जाने के बाद केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार गन्ने की कीमत, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य और इथेनॉल नीति से जुड़ी मांगों पर क्या निर्णय लेती है।

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