बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 1 नवंबर को नई दिल्ली में होने वाले विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। कांग्रेस के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वह इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे, क्योंकि उसी दिन कर्नाटक में कन्नड़ राज्योत्सव के विशेष आयोजन होने हैं। राज्य सरकार और कांग्रेस पार्टी ने इन कार्यक्रमों के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।
शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि कन्नड़ राज्योत्सव राज्य के लोगों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन सरकार की ओर से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मंत्रियों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को राज्योत्सव समारोहों में भाग लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि सिद्धारमैया को क्लीन चिट मिल चुकी है। हालांकि, कथित वीडियो के प्रसार और उससे संबंधित आरोपों की जांच अभी जारी है।
कन्नड़ राज्योत्सव को दी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि 1 नवंबर को पूरे कर्नाटक में कन्नड़ राज्योत्सव उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने विभिन्न जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।
उन्होंने बताया कि राज्य के सभी जिलों में प्रभारी मंत्री कन्नड़ ध्वज फहराएंगे और राज्योत्सव समारोहों में हिस्सा लेंगे। कांग्रेस के विधायकों तथा स्थानीय कार्यकर्ताओं को भी अपने-अपने क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, कर्नाटक की भाषा, संस्कृति और पहचान से जुड़े इस अवसर को विशेष महत्व देना जरूरी है। इसी कारण उन्होंने दिल्ली में होने वाले राजनीतिक प्रदर्शन के बजाय राज्य में उपस्थित रहने का निर्णय लिया है।
कन्नड़ राज्योत्सव हर वर्ष 1 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिन कन्नड़ भाषी क्षेत्रों के एकीकरण और कर्नाटक राज्य के गठन की ऐतिहासिक स्मृति से जुड़ा है।
दिल्ली में SIR के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन
दिल्ली में 1 नवंबर को कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन प्रस्तावित है। इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने का जोखिम है। उनका कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
दूसरी ओर, मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका घोषित उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम दर्ज करना और सूची को अद्यतन रखना है।
इसी मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के माध्यम से अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।
कांग्रेस कार्यकर्ता दिल्ली के प्रदर्शन में होंगे शामिल
डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि उनके दिल्ली नहीं जाने का अर्थ यह नहीं है कि कर्नाटक कांग्रेस विरोध प्रदर्शन से दूर रहेगी।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस के जिला और ब्लॉक स्तर के अध्यक्षों के साथ पार्टी कार्यकर्ता दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
इस तरह पार्टी ने दोनों कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति बनाए रखने की योजना बनाई है। राज्य के मंत्री और विधायक कन्नड़ राज्योत्सव के आयोजनों में शामिल होंगे, जबकि संगठन के कुछ पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता दिल्ली के प्रदर्शन में भाग लेंगे।
मुख्यमंत्री का यह फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस जारी है।
सिद्धारमैया के स्टिंग विवाद पर बोले मुख्यमंत्री
पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन के बारे में भी सवाल किया गया।
इस पर शिवकुमार ने कहा कि सिद्धारमैया को क्लीन चिट मिल चुकी है। साथ ही उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो से संबंधित मामले की जांच चल रही है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से कर्नाटक की राजनीति में कथित स्टिंग वीडियो को लेकर विवाद बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद इस मामले में विभिन्न राजनीतिक आरोप लगाए गए थे।
सिद्धारमैया ने वीडियो को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि कथित सामग्री के जरिए उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और उन्हें ब्लैकमेल करने का प्रयास किया गया।
मामले में पुलिस जांच के साथ कानूनी प्रक्रिया भी चल रही है। इसलिए मुख्यमंत्री द्वारा क्लीन चिट दिए जाने की बात को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। जांच के अंतिम निष्कर्ष और न्यायिक निर्णय को लेकर अलग से आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होगी।
कांग्रेस के भीतर भी चर्चा का विषय बना विवाद
कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं। जेडीएस नेता और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस मामले में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर आरोप लगाए थे।
हालांकि, कांग्रेस ने इन आरोपों का खंडन किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई अंतिम जांच निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी मामले की जांच की मांग की थी। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को विवाद से अवगत कराया है।
सिद्धारमैया का 1 नवंबर को दिल्ली जाने का कार्यक्रम भी सामने आया है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की इच्छा जताई थी, हालांकि मुलाकात का समय तय होने की पुष्टि नहीं की गई थी।
वताल नागराज को पुरस्कार देने की इच्छा जताई
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कन्नड़ समर्थक वरिष्ठ कार्यकर्ता वताल नागराज को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वह चाहते थे कि वताल नागराज को इस वर्ष राज्योत्सव पुरस्कार प्रदान किया जाए। लेकिन उन्हें जानकारी मिली कि नागराज पुरस्कार स्वीकार करने के इच्छुक नहीं हैं।
वताल नागराज लंबे समय से कन्नड़ भाषा और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने पहले भी राज्योत्सव पुरस्कार स्वीकार करने से इनकार किया था।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस बार भी नागराज ने पुरस्कार नहीं लेने की इच्छा जताई है।
राज्योत्सव पुरस्कार कर्नाटक सरकार की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को प्रदान किया जाता है।
राज्योत्सव और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल नहीं होने का फैसला राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की अलग-अलग प्राथमिकताओं को सामने लाता है।
एक ओर विपक्षी गठबंधन मतदाता सूची के पुनरीक्षण के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कर्नाटक सरकार 1 नवंबर को राज्योत्सव के आयोजनों में व्यस्त रहेगी।
राज्य में समारोहों की जिम्मेदारी मंत्रियों और विधायकों को देने के साथ कांग्रेस ने दिल्ली के कार्यक्रम के लिए संगठन स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही है।
फिलहाल मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 नवंबर को उनकी प्राथमिकता कन्नड़ राज्योत्सव के कार्यक्रम होंगे। वहीं, सिद्धारमैया से जुड़ा कथित स्टिंग वीडियो विवाद जांच जारी रहने के कारण राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।