तुमकुरु। कर्नाटक के तुमकुरु जिले में तेंदुए को पकड़ने के लिए चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बड़ा हंगामा हो गया। थिम्मासंद्रा गांव में नारियल के पेड़ पर चढ़े तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने पहुंची वन विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि कुछ लोगों ने वन्यजीव चिकित्सक डॉ. प्रयाग एचएस पर कथित रूप से हमला कर दिया। इस घटना में डॉक्टर घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने, मारपीट और धमकी देने के आरोपों में 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
घटना 22 अक्टूबर को तुमकुरु विश्वविद्यालय के ज्ञानसिरी परिसर के नजदीक स्थित थिम्मासंद्रा गांव में हुई थी। बताया जा रहा है कि एक तेंदुआ मुर्गियों का शिकार करने के लिए गांव में घुस आया था। इसी दौरान कुत्तों ने उसका पीछा किया, जिससे बचने के लिए तेंदुआ एक ऊंचे नारियल के पेड़ पर चढ़ गया। इसकी जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में दहशत फैल गई और वन विभाग को सूचना दी गई।
मुर्गियों का शिकार करने गांव पहुंचा था तेंदुआ
जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह थिम्मासंद्रा गांव में अचानक एक तेंदुआ दिखाई दिया। बताया गया कि वह एक घर के आसपास मौजूद मुर्गियों का शिकार करने पहुंचा था।
इसी दौरान गांव के कुछ कुत्तों की नजर तेंदुए पर पड़ गई। कुत्तों ने भौंकते हुए उसका पीछा किया।
अपने बचाव के लिए तेंदुआ पास में मौजूद नारियल के पेड़ पर चढ़ गया। कुछ ही देर में ग्रामीणों को इसकी जानकारी हो गई।
पेड़ पर तेंदुए को देखकर बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल के आसपास जमा होने लगे। ग्रामीणों को आशंका थी कि तेंदुआ नीचे उतरकर किसी व्यक्ति या पालतू पशु पर हमला कर सकता है।
इसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई और तेंदुए को पकड़ने की मांग की गई।
वन विभाग ने शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के कर्मचारी और वन्यजीव विशेषज्ञ थिम्मासंद्रा पहुंचे।
टीम ने पेड़ पर बैठे तेंदुए की स्थिति का आकलन किया और उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने की तैयारी शुरू की।
इस अभियान में बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान के उपनिदेशक एवं वन्यजीव चिकित्सक डॉ. प्रयाग एचएस भी शामिल थे।
अधिकारियों का उद्देश्य तेंदुए को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित स्थान पर ले जाना था।
हालांकि, रेस्क्यू अभियान के दौरान घटनास्थल पर जमा भीड़ बड़ी चुनौती बन गई।
वन विभाग और पुलिस ने ग्रामीणों से बार-बार सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की, लेकिन कई लोग वहां से हटने को तैयार नहीं हुए।
तेंदुए को तुरंत पकड़ने पर अड़े ग्रामीण
रेस्क्यू अभियान के दौरान ग्रामीणों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच बहस शुरू हो गई।
ग्रामीणों की मांग थी कि तेंदुए को तुरंत पकड़ा जाए, ताकि गांव में किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
दूसरी ओर अधिकारियों का कहना था कि वन्यजीव को सुरक्षित पकड़ने के लिए आवश्यक सावधानियां बरतना जरूरी है।
इस दौरान कुछ ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि रेस्क्यू के दौरान जानवर को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
इसी बात को लेकर विवाद बढ़ता चला गया।
प्रत्यक्ष जानकारी के आधार पर प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों के समझाने के बावजूद भीड़ लगातार रेस्क्यू स्थल के आसपास मौजूद रही।
डॉक्टर पर हमला करने का आरोप
वन्यजीव चिकित्सक डॉ. प्रयाग ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि कुछ ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ धक्का-मुक्की की।
उनके मुताबिक, कुछ लोगों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए धमकियां भी दीं।
शिकायत में आरोप है कि भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की और पीठ पर वार किया।
इस दौरान वन विभाग के अन्य कर्मचारियों को भी विरोध का सामना करना पड़ा।
रिपोर्टों के अनुसार, घायल डॉक्टर को बेंगलुरु के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विवाद में किन लोगों की भूमिका थी और मारपीट कैसे शुरू हुई।
हंगामे के बीच जंगल की ओर भाग निकला तेंदुआ
ग्रामीणों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच विवाद चल ही रहा था कि नारियल के पेड़ पर बैठा तेंदुआ अचानक नीचे कूद गया।
इसके बाद वह तेजी से पास के जंगल की ओर भाग निकला।
वन विभाग की टीम उसे पकड़ने में सफल नहीं हो सकी।
अधिकारियों के अनुसार, मौके पर मौजूद भीड़ और शोरगुल के कारण रेस्क्यू अभियान प्रभावित हुआ।
तेंदुए के भाग निकलने के बाद ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ गई। वे अधिकारियों से उसे तत्काल पकड़ने की मांग करने लगे।
वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और तेंदुआ दिखाई देने पर उसके पास नहीं जाने की सलाह दी।
ड्रोन फुटेज के आधार पर 15 लोगों पर केस
घटना के बाद डॉ. प्रयाग की शिकायत पर हेब्बूर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने 15 लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट और धमकी देने के आरोपों की जांच शुरू की है।
बताया जा रहा है कि घटनास्थल पर हुए विवाद के कुछ दृश्य कैमरों और ड्रोन में रिकॉर्ड हुए थे।
पुलिस इन फुटेज की मदद से घटना में शामिल लोगों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपित ग्रामीणों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी है।
हालांकि, एफआईआर में नाम आने का अर्थ किसी व्यक्ति का दोषी सिद्ध होना नहीं है। संबंधित लोगों की भूमिका जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
वन विभाग की टीम ने जताई नाराजगी
इस घटना के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने रेस्क्यू के दौरान भीड़ जुटने पर चिंता व्यक्त की है।
एक अधिकारी ने बताया कि ग्रामीण तेंदुए को तुरंत पकड़ने का दबाव बना रहे थे। इससे कर्मचारियों को काम करने में परेशानी हो रही थी।
अधिकारियों के अनुसार, वन्यजीवों का रेस्क्यू अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया है।
ऐसे अभियान में भीड़ और शोरगुल से जानवर तनाव में आ सकता है तथा अचानक हमला करने या भागने का प्रयास कर सकता है।
इसीलिए रेस्क्यू के दौरान आम लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखना आवश्यक होता है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव और आम नागरिकों की सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखकर अभियान चलाया जाता है।
गांव में तेंदुए की मौजूदगी से दहशत
थिम्मासंद्रा गांव में तेंदुआ दिखाई देने के बाद से स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों को डर है कि जंगल की ओर भागा तेंदुआ दोबारा आबादी वाले क्षेत्र में आ सकता है।
विशेष रूप से पशुपालकों और छोटे बच्चों वाले परिवारों के बीच सतर्कता बढ़ गई है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि तेंदुआ दिखाई देने पर खुद उसे पकड़ने या भगाने की कोशिश न करें।
इसके बजाय तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें।
पालतू पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखना और रात के समय अनावश्यक रूप से सुनसान इलाकों में जाने से बचना भी उपयोगी सावधानी हो सकती है।
मानव और वन्यजीव संघर्ष बना बड़ी चुनौती
कर्नाटक के विभिन्न इलाकों में आबादी के नजदीक तेंदुओं की मौजूदगी की घटनाएं सामने आती रही हैं।
वन्यजीव कभी भोजन की तलाश में तो कभी दूसरे जानवरों से बचने के प्रयास में मानव बस्तियों तक पहुंच जाते हैं।
ऐसी परिस्थितियों में वन विभाग के लिए जानवर और ग्रामीणों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीव दिखाई देने पर भीड़ जुटाने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को काम करने देना चाहिए।
इससे जानवर के आक्रामक होने और लोगों के घायल होने का खतरा कम किया जा सकता है।
पुलिस जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल हेब्बूर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस घटनास्थल के वीडियो, डॉक्टर की शिकायत और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपित व्यक्तियों की भूमिका निर्धारित करेगी।
वहीं, घायल वन्यजीव चिकित्सक डॉ. प्रयाग का उपचार जारी है।
इस घटना ने वन्यजीव बचाव अभियानों के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
थिम्मासंद्रा की घटना से एक बार फिर स्पष्ट हुआ है कि वन्यजीव रेस्क्यू के दौरान भीड़ का दबाव न केवल अभियान को प्रभावित कर सकता है, बल्कि आम लोगों, वन कर्मचारियों और जानवर की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।