बेंगलुरु। कर्नाटक के तुमकुरु जिले में वीरशैव-लिंगायत समुदाय के नेताओं की एक नाश्ते की बैठक के दौरान राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना की ओर से आयोजित इस बैठक में भाजपा और कांग्रेस से जुड़े नेताओं के बीच चुनाव प्रचार को लेकर तीखी बहस हुई। विवाद उस समय शुरू हुआ, जब कर्नाटक विधान परिषद के दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार के.एम. सुरेश के समर्थन में वोट मांगने की अपील की गई। कांग्रेस उम्मीदवार शशि हुलिकुंटे मठ ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सामुदायिक कार्यक्रम को राजनीतिक प्रचार का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।यह घटना तुमकुरु शहर के मुरुघराजेंद्र ऑडिटोरियम में हुई। यहां वीरशैव-लिंगायत समुदाय के प्रमुख नेताओं और सदस्यों की बैठक आयोजित की गई थी। कार्यक्रम की शुरुआत सामान्य माहौल में हुई, लेकिन चुनाव प्रचार का मुद्दा उठते ही राजनीतिक मतभेद सामने आ गए।
केंद्रीय मंत्री के सामने कांग्रेस नेता ने जताई आपत्ति
जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान भाजपा विधायक ज्योतिगणेश ने सबसे पहले एनडीए उम्मीदवार के.एम. सुरेश के पक्ष में समर्थन मांगा।इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार शशि हुलिकुंटे मठ ने भी अपनी उम्मीदवारी को लेकर बात रखी। हालांकि, जब केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना ने सुरेश के समर्थन में चुनाव प्रचार शुरू किया, तो शशि हुलिकुंटे ने आपत्ति दर्ज कराई।उन्होंने कहा कि वीरशैव महासभा की बैठक किसी राजनीतिक दल के उम्मीदवार के पक्ष में वोट मांगने का उचित स्थान नहीं है।इस आपत्ति के बाद कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों के बीच बहस शुरू हो गई और बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
वीरशैव महासभा के मंच के इस्तेमाल पर विवाद
शशि हुलिकुंटे मठ वीरशैव महासभा के जिला उपाध्यक्ष भी हैं। उन्होंने संगठन के मंच का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की।उनका कहना था कि सामुदायिक संगठन की बैठक का उद्देश्य समाज से जुड़े विषयों पर चर्चा करना होना चाहिए। इसे किसी विशेष राजनीतिक दल के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम का रूप नहीं दिया जाना चाहिए।इसी मुद्दे को लेकर शशि हुलिकुंटे और बैठक में उपस्थित कुछ अन्य सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई।बताया गया कि विवाद बढ़ने के कारण कुछ समय के लिए कार्यक्रम में अव्यवस्था की स्थिति बन गई।
केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना ने किया हस्तक्षेप
बैठक में तनाव बढ़ने के बाद केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना और हेब्बाका रवि ने हस्तक्षेप किया।दोनों नेताओं ने विवाद को शांत कराने का प्रयास किया और कार्यक्रम में मौजूद लोगों को समझाया। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई।हालांकि, इस घटनाक्रम ने सामुदायिक संगठनों के कार्यक्रमों में राजनीतिक प्रचार किए जाने को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक ही समुदाय से आते हैं दोनों उम्मीदवार
दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए उम्मीदवार के.एम. सुरेश और कांग्रेस उम्मीदवार शशि हुलिकुंटे मठ दोनों वीरशैव-लिंगायत समुदाय से आते हैं।इसी कारण समुदाय के भीतर दोनों उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक चर्चा हो रही है। दोनों अलग-अलग राजनीतिक गठबंधनों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।एक ही समुदाय से जुड़े उम्मीदवारों के बीच चुनावी मुकाबले की स्थिति में सामुदायिक मंचों पर राजनीतिक समर्थन का मुद्दा महत्वपूर्ण बन गया है।
विधान परिषद चुनाव को लेकर बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां
कर्नाटक विधान परिषद का दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र राज्य की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है।स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान का अधिकार निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले पंजीकृत स्नातक मतदाताओं को मिलता है।ऐसे चुनावों में राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक समूहों के बीच संपर्क बढ़ाते हैं।तुमकुरु में आयोजित बैठक के दौरान भी उम्मीदवारों के समर्थन का मुद्दा सामने आया, जिसके बाद विवाद पैदा हुआ।
सामुदायिक कार्यक्रम में राजनीतिक प्रचार पर उठे सवाल
इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल सामने आया है कि सामाजिक और सामुदायिक संगठनों के कार्यक्रमों में राजनीतिक प्रचार किस सीमा तक उचित है।कांग्रेस उम्मीदवार शशि हुलिकुंटे ने महासभा के मंच का चुनाव प्रचार के लिए इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई, जबकि बैठक में एनडीए उम्मीदवार के समर्थन में अपील की गई थी।फिलहाल यह मामला नेताओं के बीच हुई बहस तक सीमित बताया गया है। किसी औपचारिक शिकायत या पुलिस कार्रवाई की पुष्टि सामने नहीं आई है।तुमकुरु की इस घटना ने विधान परिषद चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को चर्चा में ला दिया है।
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