बेंगलुरु। कर्नाटक में विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों ने सत्तारूढ़ कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। राज्य की चार विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की है। इनमें तीन सीटें भाजपा और एक सीट जेडीएस के खाते में गई है। सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में लगा, जहां पार्टी अपने मौजूदा एमएलसी की सीट भी नहीं बचा सकी। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद जेडीएस ने बैलेट पेपर से हुए मतदान का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है।

बेंगलुरु शिक्षक सीट पर कांग्रेस को करारी हार

कर्नाटक की बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन सीट पर जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य पुटन्ना को पराजित कर दिया। रंगनाथ को पहली वरीयता के 10,810 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार पुटन्ना को 9,902 मत प्राप्त हुए। इस तरह रंगनाथ ने पहली वरीयता के मतों में 908 वोटों की बढ़त हासिल की।

पुटन्ना इस निर्वाचन क्षेत्र का पांच बार प्रतिनिधित्व कर चुके थे। ऐसे में उनकी हार को कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है। भाजपा और जेडीएस गठबंधन ने इस सीट पर पूरी ताकत झोंक दी थी। वहीं, कांग्रेस अपने अनुभवी नेता के सहारे सीट बरकरार रखने की कोशिश कर रही थी।

बैलेट पेपर पर हार को लेकर राहुल गांधी पर तंज

चुनाव परिणाम सामने आने के बाद जेडीएस नेता निखिल कुमारस्वामी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस बार कांग्रेस ईवीएम पर आरोप नहीं लगा सकती, क्योंकि चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए थे।

निखिल कुमारस्वामी ने सोशल मीडिया पर कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार है और चुनाव भी बैलेट पेपर के जरिए हुए। इसके बावजूद एनडीए समर्थित उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की।

उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि जब शिक्षकों ने बैलेट पेपर से मतदान किया है, तो अब हार के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। जेडीएस नेता ने विजयी उम्मीदवार और गठबंधन के कार्यकर्ताओं को बधाई भी दी।

चारों सीटों पर भाजपा-जेडीएस गठबंधन का दबदबा

कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इनमें बेंगलुरु शिक्षक, उत्तर-पूर्व शिक्षक, दक्षिण-पूर्व स्नातक और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे।

भाजपा ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जबकि बेंगलुरु शिक्षक सीट जेडीएस के हिस्से में आई थी। उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार शशिल जी. नमोशी ने जीत दर्ज की। दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट पर भाजपा के केएम सुरेश और पश्चिम स्नातक सीट पर एसवी संकनूर की जीत से गठबंधन ने सभी चार सीटों पर सफलता हासिल की।

इस प्रदर्शन को राज्य में विपक्षी गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। भाजपा और जेडीएस ने चुनाव में संयुक्त रणनीति अपनाई थी, जिसका फायदा दोनों दलों को मिला।

चारों निर्वाचन क्षेत्रों में हुआ जबरदस्त मतदान

इन चुनावों में शिक्षक और स्नातक मतदाताओं ने बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक 86.97 प्रतिशत मतदान हुआ।

बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 81.98 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले। पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 75.62 प्रतिशत और दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 73.58 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

चारों सीटों पर कुल 43 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। अधिक मतदान के कारण मुकाबले को दिलचस्प माना जा रहा था। राजनीतिक दलों ने शिक्षकों और स्नातक मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाया था।

कांग्रेस की रणनीति पर उठने लगे सवाल

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद विधान परिषद चुनाव में सभी चार सीटों पर हार ने पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेष रूप से बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पुटन्ना की हार को बड़ा झटका माना जा रहा है। पुटन्ना पहले जेडीएस में थे और विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे। कांग्रेस को उम्मीद थी कि उनका लंबा राजनीतिक अनुभव और शिक्षकों के बीच संपर्क पार्टी को जीत दिलाने में मदद करेगा।

हालांकि, भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने इस सीट पर कांग्रेस को मात देकर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने का संदेश दिया है।

विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

कर्नाटक में इन चुनाव परिणामों को आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा और जेडीएस गठबंधन को मिली सफलता से विपक्ष का मनोबल बढ़ा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं। इनमें सीमित और पंजीकृत मतदाता हिस्सा लेते हैं। इसलिए इन परिणामों को पूरे राज्य के जनमत का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता।

फिर भी चारों सीटों पर हार कांग्रेस के लिए चिंतन का विषय है। खासकर उस समय जब पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत बनाए रखने का प्रयास कर रही है।

विधान परिषद में क्या होगा असर?

कर्नाटक विधान परिषद में कुल 75 सदस्य होते हैं। चार सीटों के चुनाव परिणाम से राज्य सरकार की स्थिरता पर तत्काल कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है। हालांकि, विपक्षी गठबंधन को विधान परिषद में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।

कांग्रेस के सामने अब शिक्षकों और स्नातक मतदाताओं के बीच अपना समर्थन बढ़ाने की चुनौती होगी। दूसरी ओर, भाजपा और जेडीएस इस जीत को अपनी गठबंधन रणनीति की सफलता के रूप में पेश कर रहे हैं।

चुनाव नतीजों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा-जेडीएस गठबंधन के बीच राजनीतिक मुकाबला आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।

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