Bengaluru : सीगेहल्ली झील में प्लास्टिक बैरियर फेल, रखरखाव की कमी पर उठे सवाल
Karnataka कर्नाटक: पूर्वी बेंगलुरु के झील कार्यकर्ता बालाजी रघुथम ने जब सीगेहल्ली झील में लगाए गए प्लास्टिक बैरियर को देखा, तो शुरुआत में उन्हें उम्मीद जगी कि इससे झील में प्लास्टिक कचरे को रोका जा सकेगा। लेकिन कुछ ही दिनों बाद यह उम्मीद टूट गई, जब उन्होंने पाया कि बैरियर के ऊपर से कचरा बहकर सीधे झील के पानी में पहुंच रहा है।
स्थानीय अधिकारियों ने स्वीकार किया कि लगाए गए प्लास्टिक बैरियर की क्षमता सीमित थी और वह भारी मात्रा में कचरे को रोकने में असमर्थ रहा। अधिकारियों का कहना है कि अब इस समस्या को देखते हुए एक बेहतर और मजबूत सिस्टम लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि आखिर ऐसे कई उपाय, जिन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, वे अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं दे पाते। विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या केवल तकनीक की नहीं, बल्कि उसके सही रखरखाव की भी है।
बेंगलुरु स्थित WELL लैब्स की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर वीणा श्रीनिवासन ने इस मुद्दे पर कहा कि प्लास्टिक ट्रैपर और बैरियर सामान्य तौर पर कचरे को रोकने में प्रभावी होते हैं, लेकिन उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उन्हें कितनी नियमितता से साफ और मेंटेन किया जाता है।
उन्होंने बताया कि अक्सर इन संरचनाओं की सफाई और निगरानी के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था या नियम नहीं बनाए जाते, जिससे समय के साथ उनकी प्रभावशीलता कम हो जाती है। उनके अनुसार, “इनकी सफाई के लिए कोई नियम या तरीका नहीं बनाया जाता। इसलिए समस्या उपाय की नहीं है, बल्कि इसके रखरखाव के लिए फंड और कर्मचारियों की व्यवस्था न करने की है।”
स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि झीलों में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए केवल संरचनात्मक समाधान काफी नहीं हैं, बल्कि नियमित निगरानी और जिम्मेदार रखरखाव भी उतना ही जरूरी है।
इस घटना ने शहरी जल निकायों के प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की योजनाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दीर्घकालिक रखरखाव और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक ऐसे प्रयास सीमित प्रभाव ही दिखा पाएंगे।
फिलहाल प्रशासन ने बैरियर सिस्टम को अपग्रेड करने की बात कही है, लेकिन स्थानीय लोग अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि नया सिस्टम कितना प्रभावी साबित होता है।