बेंगलुरु। भारतीय सेना के प्रमुख (COAS) जनरल धीरज सेठ ने रविवार को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित 515 आर्मी बेस वर्कशॉप का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सेना के लिए विकसित की जा रही आधुनिक तकनीकों, स्वदेशी ड्रोन निर्माण और उन्नत विनिर्माण से जुड़ी विभिन्न पहलों की समीक्षा की। सेना प्रमुख ने एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, क्वांटम टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने स्वदेशी नवाचार के माध्यम से सैन्य उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने और सेना की परिचालन तैयारियों को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की।भारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट साझा कर सेना प्रमुख के इस दौरे की जानकारी दी। सेना के अनुसार, 515 आर्मी बेस वर्कशॉप में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल और घरेलू क्षमताओं को बढ़ावा देने की दिशा में कई पहल की जा रही हैं। इनका उद्देश्य सैन्य उपकरणों के रखरखाव, आधुनिकीकरण और परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने के लिए नए समाधान विकसित करना है।
515 आर्मी बेस वर्कशॉप का किया निरीक्षण
भारतीय सेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने बेंगलुरु स्थित 515 आर्मी बेस वर्कशॉप का दौरा कर वहां चल रही तकनीकी गतिविधियों का जायजा लिया।इस दौरान उनका विशेष ध्यान उन्नत विनिर्माण और स्वदेशी तकनीक के विकास पर रहा। उन्होंने उन पहलों की समीक्षा की, जिनके माध्यम से सेना अपने उपकरणों की उपलब्धता और परिचालन क्षमता को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है।सेना प्रमुख ने आधुनिक तकनीकों के उपयोग से सैन्य उपकरणों के रखरखाव और आधुनिकीकरण में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी प्राप्त की।भारतीय सेना ने बताया कि वर्कशॉप में स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने के साथ नई तकनीकी क्षमताओं के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है।
स्वदेशी ड्रोन डेवलपमेंट पर विशेष जोर
सेना प्रमुख के दौरे में स्वदेशी ड्रोन विकास से जुड़ी पहलों को भी प्रमुखता दी गई।भारतीय सेना ने बताया कि 515 आर्मी बेस वर्कशॉप में घरेलू तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ड्रोन विकास से संबंधित कार्य किए जा रहे हैं।ड्रोन तकनीक आधुनिक सैन्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका उपयोग निगरानी, सूचनाएं जुटाने और विभिन्न परिचालन आवश्यकताओं में किया जा सकता है।स्वदेशी ड्रोन तकनीक विकसित करने से घरेलू स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञता और संबंधित उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।हालांकि, भारतीय सेना की ओर से साझा की गई जानकारी में किसी विशेष ड्रोन मॉडल, उसकी क्षमता या परीक्षण से संबंधित विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।सेना प्रमुख ने वर्कशॉप में चल रही स्वदेशी तकनीकी पहलों की सराहना करते हुए इन्हें परिचालन तैयारियों से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीक की समीक्षा
जनरल धीरज सेठ ने अपने दौरे के दौरान एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी पहलों का भी जायजा लिया।एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग एक आधुनिक विनिर्माण तकनीक है, जिसमें डिजिटल डिजाइन के आधार पर सामग्री की परतें जोड़कर विभिन्न प्रकार के पुर्जे और उपकरण तैयार किए जा सकते हैं।इस तकनीक को सामान्य तौर पर थ्री-डी प्रिंटिंग से भी जोड़ा जाता है।सैन्य उपकरणों के रखरखाव के क्षेत्र में ऐसी तकनीकों का उपयोग विशेष प्रकार के पुर्जों के निर्माण और तकनीकी समाधान विकसित करने में उपयोगी हो सकता है।भारतीय सेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, वर्कशॉप में उन्नत विनिर्माण तकनीकों के माध्यम से उपकरणों की उपलब्धता और परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।हालांकि, इस दौरे के दौरान एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग से तैयार किसी विशिष्ट सैन्य उपकरण या पुर्जे का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।
क्वांटम और स्पेस टेक्नोलॉजी की पहलों का लिया जायजा
सेना प्रमुख ने क्वांटम और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में चल रही पहलों की भी समीक्षा की।भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक बयान में इन तकनीकों को वर्कशॉप की महत्वपूर्ण गतिविधियों में शामिल बताया।क्वांटम टेक्नोलॉजी आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान का एक क्षेत्र है, जिसमें संचार, संवेदन और गणना से संबंधित नई संभावनाओं पर काम किया जाता है।इसी तरह स्पेस टेक्नोलॉजी का संबंध उपग्रह आधारित प्रणालियों और अंतरिक्ष से जुड़ी तकनीकी क्षमताओं से है।आधुनिक सैन्य व्यवस्था में इन क्षेत्रों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, 515 आर्मी बेस वर्कशॉप में इन तकनीकों से संबंधित कौन-सी विशिष्ट परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, इसकी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई।सेना प्रमुख ने इन उभरती तकनीकों के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली और स्वदेशी नवाचार की दिशा में काम करने वाली पहलों की सराहना की।
सैन्य उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने पर ध्यान
भारतीय सेना के अनुसार, इन तकनीकी पहलों का एक प्रमुख उद्देश्य सैन्य उपकरणों की उपलब्धता को बेहतर बनाना है।सेना के लिए उपकरणों का नियमित रखरखाव और समय पर उनकी उपलब्धता परिचालन तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।इसी को ध्यान में रखते हुए 515 आर्मी बेस वर्कशॉप में आधुनिक तकनीकों और घरेलू नवाचार के माध्यम से नए समाधान विकसित करने पर काम किया जा रहा है।स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने से उपकरणों के रखरखाव और आधुनिकीकरण में नए विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।भारतीय सेना ने कहा कि इन प्रयासों के माध्यम से परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।सेना प्रमुख ने भी उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए किए जा रहे स्वदेशी नवाचार की सराहना की।
स्वदेशी नवाचार की सेना प्रमुख ने की सराहना
भारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि जनरल धीरज सेठ ने वर्कशॉप में किए जा रहे नवाचार संबंधी प्रयासों की प्रशंसा की।सेना के अनुसार, ये पहलें स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में उसके प्रयासों को दर्शाती हैं।सेना प्रमुख ने विशेष रूप से उन कार्यों की सराहना की, जिनका उद्देश्य उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाना और परिचालन तैयारियों में सुधार करना है।उन्होंने उन्नत विनिर्माण, स्वदेशी ड्रोन विकास और नई तकनीकों से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा की।यह दौरा सेना के रखरखाव और आधुनिकीकरण संबंधी कार्यों में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित करता है।
सैन्य आधुनिकीकरण में नई तकनीकों की भूमिका
भारतीय सेना अपने सैन्य उपकरणों के रखरखाव और आधुनिकीकरण के लिए तकनीकी क्षमताओं को विकसित करने पर ध्यान दे रही है।515 आर्मी बेस वर्कशॉप में चल रही पहलें इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा हैं।उन्नत विनिर्माण, ड्रोन विकास, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, क्वांटम और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में काम करने से सेना के सामने नई तकनीकी संभावनाएं खुल सकती हैं।इन पहलों के माध्यम से सैन्य उपकरणों के लिए घरेलू स्तर पर समाधान विकसित करने और परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिल सकती है।भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि उसका ध्यान स्वदेशी तकनीक और नवाचार के माध्यम से सैन्य तैयारियों को मजबूत करने पर है।बेंगलुरु स्थित 515 आर्मी बेस वर्कशॉप का सेना प्रमुख का दौरा इसी उद्देश्य से जुड़ा रहा। उन्होंने वहां चल रही तकनीकी पहलों का जायजा लिया और उपकरणों की उपलब्धता तथा परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने के प्रयासों की सराहना की।
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