मैसूर में कांग्रेस की अंदरूनी कलह के बीच यतींद्र सिद्धारमैया ने की महादेवप्पा से मुलाकात
मैसूर। कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही कथित गुटबाजी और नेताओं के बीच बढ़ते असंतोष की चर्चाओं के बीच मैसूर की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिली है। राज्य के मंत्री और मैसूर जिला प्रभारी डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं विधायक डॉ. एच.सी. महादेवप्पा से मुलाकात की। रविवार को मैसूर के एक निजी होटल में हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच हुई इस लंच मीटिंग को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब पुराने मैसूर क्षेत्र में कांग्रेस के भीतर आपसी मतभेद और नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं।
इस बैठक में विधान परिषद के पूर्व सदस्य वेणुगोपाल भी मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने भोजन के दौरान काफी देर तक बातचीत की और विभिन्न राजनीतिक एवं संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की। हालांकि, बैठक में किन विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसके बावजूद मुलाकात के समय और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इसे कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। यह मुलाकात करीब 30 मिनट तक चली।
दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एच.सी. महादेवप्पा हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। पिछली सरकार के दौरान वह मैसूर जिले के प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। पार्टी में उनका लंबा राजनीतिक अनुभव और पुराने मैसूर क्षेत्र में प्रभाव माना जाता है। हालांकि, हालिया मंत्रिमंडल गठन में उन्हें जगह नहीं मिल सकी। इसके बाद से उनकी नाराजगी और पार्टी के कुछ प्रमुख नेताओं से दूरी को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं।
बताया जा रहा है कि महादेवप्पा मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने पार्टी की कुछ गतिविधियों से भी दूरी बनाए रखी है। इससे कांग्रेस के भीतर उनकी अगली राजनीतिक रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इससे पहले भी महादेवप्पा के साथ पूर्व मंत्री के. वेंकटेश और तनवीर सैत की बैठक चर्चा में रही थी। इन नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने के बाद उनकी नाराजगी की खबरें सामने आई थीं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण पहलू 26 नवंबर को मैसूर में आयोजित होने वाले संविधान दिवस कार्यक्रम को लेकर सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, इस आयोजन को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। महादेवप्पा दलित संगठनों और संविधान संरक्षण से जुड़े समूहों के साथ मिलकर एक बड़े सम्मेलन की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, राज्य सरकार की ओर से भी इसी दिन मैसूर में राज्य स्तरीय संविधान दिवस कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी चल रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, महादेवप्पा से जुड़े संगठनों ने 26 और 27 नवंबर को महाराजा कॉलेज मैदान में संविधान और लोकतंत्र को लेकर दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई है। वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया की अगुवाई में राज्य सरकार के कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा हुई है। दोनों आयोजनों की तारीख और प्रस्तावित स्थान एक होने की वजह से राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
इसी मुद्दे को लेकर 29 अक्टूबर को बेंगलुरु में भी कांग्रेस नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में मैसूर, मांड्या और चामराजनगर क्षेत्र के कई मंत्री, विधायक और विधान परिषद सदस्य शामिल हुए थे। बैठक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मौजूदगी में संविधान दिवस के राज्य स्तरीय आयोजन की तैयारियों पर चर्चा की गई। हालांकि, इस बैठक में एच.सी. महादेवप्पा की अनुपस्थिति ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी। माना जा रहा है कि संविधान दिवस समारोह को लेकर अलग-अलग स्तर पर हो रही तैयारियां पार्टी के भीतर नेताओं के बीच राजनीतिक प्रभाव और नेतृत्व को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा को सामने ला रही हैं।
पुराना मैसूर क्षेत्र कर्नाटक की राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का मजबूत जनाधार है। ऐसे में पार्टी के भीतर किसी भी तरह की गुटबाजी का असर आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर पड़ सकता है। महादेवप्पा लंबे समय से कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हैं और सामाजिक संगठनों के बीच भी उनकी पहचान रही है। दूसरी ओर, यतींद्र सिद्धारमैया वर्तमान में मैसूर जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को पार्टी के अंदर संवाद और समीकरणों को संतुलित करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा भी है कि कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहेगा कि मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी संगठन के लिए बड़ी चुनौती बन जाए। खासकर 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी के लिए पुराने मैसूर क्षेत्र में एकजुटता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। यदि वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद बढ़ते हैं तो इसका असर पार्टी की स्थानीय रणनीति और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ सकता है।
फिलहाल यतींद्र सिद्धारमैया और महादेवप्पा की मुलाकात के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल एक सामान्य राजनीतिक मुलाकात थी या फिर कांग्रेस के भीतर चल रही नाराजगी को दूर करने की दिशा में कोई पहल की गई है। दोनों नेताओं की ओर से किसी विवाद या समझौते को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में मुलाकात के वास्तविक राजनीतिक उद्देश्य को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
अब सबकी निगाहें 26 नवंबर को मैसूर में होने वाले संविधान दिवस समारोह पर टिकी हैं। दोनों आयोजनों को लेकर आगे क्या फैसला होता है और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किस तरह एक मंच पर आते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल यतींद्र और महादेवप्पा की लंच मीटिंग ने कर्नाटक कांग्रेस के भीतर चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।