बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में अवैध रूप से संचालित पेइंग गेस्ट (PG) आवासों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) की जांच में सामने आया है कि शहर में हजारों पीजी आवास बिना आवश्यक अनुमति और निर्धारित नियमों का पालन किए संचालित हो रहे हैं। पांच नगर निगमों के अंतर्गत आने वाले 5,000 से अधिक पीजी आवासों को व्यवस्थित करने के लिए जीबीए अब नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रही है। हालांकि, नागरिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब पुराने नियमों का पालन ही नहीं कराया जा सका, तो नए दिशानिर्देशों से स्थिति में कितना सुधार होगा, यह देखना बाकी है।
ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के ऑडिट के अनुसार, शहर में कुल 5,480 पीजी आवासों में से 3,597 के पास आवश्यक वैध अनुमति नहीं पाई गई। यानी बड़ी संख्या में पीजी आवास नियमों का पालन किए बिना संचालित हो रहे हैं। यह आंकड़ा शहर में किराये के आवासों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बेंगलुरु देश के प्रमुख आईटी और औद्योगिक शहरों में शामिल है। यहां देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र, नौकरीपेशा युवा और निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी आते हैं। इनमें से कई लोग कम किराये और सुविधाजनक स्थान के कारण पीजी आवासों में रहना पसंद करते हैं।
आईटी कंपनियों, शिक्षण संस्थानों और व्यावसायिक केंद्रों के आसपास पीजी आवासों की मांग अधिक रहती है। इस बढ़ती मांग के कारण शहर में बड़ी संख्या में निजी पीजी संचालित किए जा रहे हैं। हालांकि, इनमें से सभी आवास जरूरी सुरक्षा मानकों और भवन निर्माण संबंधी नियमों को पूरा नहीं करते।
जीबीए की समीक्षा में कई ऐसे पीजी सामने आए हैं, जहां भवन निर्माण से संबंधित नियमों का उल्लंघन हुआ है। कुछ स्थानों पर स्वीकृत भवन योजना से अधिक मंजिलों का निर्माण किया गया, जबकि अन्य जगहों पर बेसमेंट का इस्तेमाल रसोईघर के रूप में किए जाने और आवश्यक लाइसेंस नहीं होने जैसी समस्याएं सामने आई हैं।
इन परिस्थितियों में आग लगने, भवन में दुर्घटना होने या आपातकालीन स्थिति पैदा होने पर वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से अधिक संख्या में लोगों के रहने वाले भवनों में पर्याप्त निकास मार्ग और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का होना आवश्यक है।
इस मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को अवैध पीजी आवासों के खिलाफ नियमों के अनुसार कदम उठाने की अनुमति दी है। इसमें गंभीर उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों को सील करने जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
हाईकोर्ट ने पीजी संचालकों को निर्धारित मानकों का पालन करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया है। अदालत ने यह भी माना कि बड़ी संख्या में छात्र और नौकरीपेशा लोग पीजी आवासों पर निर्भर हैं। इसलिए कार्रवाई करते समय वहां रहने वाले लोगों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
इसी बीच जीबीए ने नई एसओपी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य पीजी आवासों के संचालन, सुरक्षा, स्वच्छता और आवश्यक अनुमति से संबंधित व्यवस्थाओं को अधिक स्पष्ट बनाना है।
हालांकि, नई एसओपी की विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि नियमों का पालन कराने के लिए किस स्तर पर निरीक्षण किया जाएगा और उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे।
बेंगलुरु कोएलिशन के राजगोपालन आर. ने इस मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पिछले लगभग एक दशक से पीजी संचालन में नियमों का उल्लंघन होता रहा है, लेकिन अधिकारियों ने समय रहते पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
राजगोपालन का कहना है कि हाईकोर्ट के लगातार सख्त निर्देशों के बाद ही जीबीए ने इस समस्या पर ध्यान देने की बात कही है। उन्होंने दावा किया कि अब तक नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वर्ष 2024 में जारी दिशानिर्देशों का खुलेआम उल्लंघन जारी रहने के बावजूद प्रशासन नई नीति या एसओपी तैयार करने पर जोर दे रहा है। उनके अनुसार, केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सख्ती से पालन कराना भी जरूरी है।
राजगोपालन ने आवासीय क्षेत्रों में पीजी संचालन से संबंधित नियमों को अधिक स्पष्ट और सख्त बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पीजी आवास और छात्रावास अलग प्रकार की व्यवस्थाएं हैं, इसलिए इनका वर्गीकरण भी उसी अनुसार होना चाहिए।
दूसरी ओर, पीजी संचालकों के संगठन ने इन आवासों के महत्व पर जोर दिया है। संगठन का कहना है कि बेंगलुरु में पढ़ाई और रोजगार के लिए आने वाले युवाओं को पीजी के रूप में अपेक्षाकृत किफायती आवास उपलब्ध होते हैं।
संगठन के अनुसार, इन आवासों पर अचानक कठोर कार्रवाई से बड़ी संख्या में छात्रों और कर्मचारियों को रहने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, नागरिक संगठन इस तर्क से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। सिटिजंस एजेंडा फॉर बेंगलुरु के संयोजक संदीप अनिरुद्धन ने अवैध पीजी आवासों और निर्माण नियमों के उल्लंघन को शहर के अनियोजित विकास तथा नियमों के कमजोर क्रियान्वयन से जुड़ी समस्या बताया है।
उनका कहना है कि समस्या केवल पीजी आवासों तक सीमित नहीं है, बल्कि भवन निर्माण नियमों की निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ी हुई है।
इस पूरे विवाद ने शहर में रहने वाले हजारों छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पीजी में रहने वाले लोगों के लिए भवन की मजबूती, अग्निशमन व्यवस्था, स्वच्छता, पर्याप्त जगह और आपातकालीन निकास जैसी सुविधाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
अब सभी की नजरें जीबीए की प्रस्तावित एसओपी पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए नियमों में सुरक्षा और संचालन संबंधी क्या प्रावधान किए जाते हैं तथा उन्हें लागू करने के लिए प्रशासन कौन-सी व्यवस्था अपनाता है।
फिलहाल बेंगलुरु में 3,597 अनधिकृत पीजी का आंकड़ा सामने आने के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती नियमों का पालन सुनिश्चित कराना और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा बनाए रखना है।