चंडीगढ़। नगर निगम की अमृत योजना के तहत सीवर लाइन बिछाने के काम में कथित बड़ा घोटाला सामने आया है। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित प्रेस साइट के पास सीवर पाइप लाइन परियोजना में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। जांच में सामने आया है कि रिकॉर्ड में जितना काम दिखाया गया, मौके पर उतनी पाइपलाइन बिछी ही नहीं मिली। इस मामले में नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

आरोप है कि परियोजना में ठेकेदार को अधिक भुगतान कर दिया गया, जबकि जमीन पर काम कम हुआ। हैरानी की बात यह है कि मामले में सामने आई गड़बड़ी के बावजूद निगम के कुछ अधिकारी इसे दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

अमृत योजना के तहत दिया गया था काम

जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में 300 एमएम और 450 एमएम की सीवर पाइपलाइन बिछाने का काम मनीमाजरा स्थित मैसर्स कुलविंद्र एंटरप्राइजेज को सौंपा था।

ठेकेदार कंपनी को यह काम 30 दिसंबर को अलॉट किया गया था। परियोजना के तहत क्षेत्र में नई सीवर लाइन बिछाई जानी थी, ताकि सीवर व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।

काम पूरा होने के दौरान निगम की ओर से ठेकेदार को भुगतान भी किया गया। अब तक ठेकेदार को करीब 31.70 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

रिकॉर्ड और मौके के काम में बड़ा अंतर

मामले में सबसे बड़ा खुलासा उस समय हुआ, जब साइट की जांच की गई। एसडीओ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उन्होंने जूनियर इंजीनियर सवजोत सिंह के साथ मौके पर जाकर पाइपलाइन की पैमाइश की।

जांच के दौरान मौके पर केवल 380 मीटर सीवर पाइपलाइन ही बिछी हुई मिली। जबकि निगम के रिकॉर्ड में 598 मीटर पाइपलाइन बिछाने का भुगतान दर्ज था।

इस हिसाब से करीब 218 मीटर पाइपलाइन का भुगतान ऐसा दिखाया गया, जिसका काम मौके पर मौजूद ही नहीं था। जांच रिपोर्ट में इस अंतर को गंभीर अनियमितता माना गया है।

जूनियर इंजीनियर ने बनाया था रनिंग बिल

जानकारी के मुताबिक, ठेकेदार को किए गए भुगतान में दूसरा रनिंग बिल जूनियर इंजीनियर गुरप्रीत सिंह द्वारा तैयार किया गया था। यह बिल 20 मई 2026 को बनाया गया था।

अब सवाल उठ रहे हैं कि जब मौके पर काम कम हुआ था तो बिल में ज्यादा मात्रा कैसे दर्ज की गई। क्या बिना जांच के भुगतान कर दिया गया या फिर जानबूझकर रिकॉर्ड में बदलाव किया गया।

अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

मामला सामने आने के बाद नगर निगम के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि कुछ अधिकारी इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं और ठेकेदार को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

हालांकि, जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन अधिकारी शामिल थे।

सरकारी धन के नुकसान की आशंका

अमृत योजना केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य शहरों में मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाना है। ऐसे में यदि योजना के तहत होने वाले कार्यों में गड़बड़ी होती है तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बन सकता है।

218 मीटर अतिरिक्त पाइपलाइन का भुगतान होने से निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इसमें कितनी राशि का नुकसान हुआ है।

जांच और कार्रवाई का इंतजार

फिलहाल इस मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार है। अधिकारियों से जवाब मांगा जा सकता है और ठेकेदार से भी संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।

नगर निगम प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान करे। अगर जांच में गड़बड़ी साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

सीवर लाइन जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में इस तरह की अनियमितताएं जनता के पैसे और सुविधाओं दोनों पर असर डालती हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद इस कथित घोटाले में कौन-कौन जिम्मेदार पाए जाते हैं।

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