रांची: रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी नामांकन-2026 के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों के साक्षात्कार आज, गुरुवार 22 अक्टूबर से शुरू होंगे। तीन दिवसीय प्रक्रिया 24 अक्टूबर तक चलेगी। साक्षात्कार सुबह 11 बजे से मोरहाबादी परिसर स्थित संबंधित स्नातकोत्तर विभागों में आयोजित किए जाएंगे। अभ्यर्थियों को अपने विषय और सूची में निर्धारित क्रमांक के अनुसार उपस्थित होना होगा। विश्वविद्यालय ने आवेदन की हार्ड कॉपी के साथ जरूरी मूल प्रमाणपत्र लाने का निर्देश दिया है। अंतिम चयन में पात्रता परीक्षा के अंकों और साक्षात्कार में प्रदर्शन, दोनों को महत्व मिलेगा। 
साक्षात्कार के लिए चार सदस्यीय बोर्ड गठित किया गया है। इसमें विभागीय शोध समिति यानी डीआरसी के अध्यक्ष, कुलपति द्वारा मनोनीत विषय विशेषज्ञ, शोध निदेशालय की ओर से मनोनीत एक सदस्य और संबंधित विभाग के पीएचडी समन्वयक या संयोजक शामिल होंगे। अभ्यर्थियों का मूल्यांकन इसी बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा। प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े निर्णय कुलपति प्रोफेसर सरोज शर्मा की अध्यक्षता में हुई संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों और शोध निदेशालय के सदस्यों की बैठक में लिए गए थे।
मूल्यांकन में प्रत्येक सदस्य स्वतंत्र रूप से अंक देगा और हस्ताक्षर करेगा। इसके बाद सभी सदस्यों के अंकों का औसत निकालकर अंतिम स्कोरकार्ड तैयार किया जाएगा। पैनल सदस्यों को अभ्यर्थियों के स्कोरकार्ड की छायाप्रति भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस व्यवस्था के तहत अलग-अलग सदस्यों का मूल्यांकन अंतिम साक्षात्कार अंक निर्धारित करने का आधार बनेगा। दस्तावेजों का सत्यापन भी प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा रहेगा। पहले दिन 22 अक्टूबर को मानवशास्त्र, वाणिज्य, भूगर्भ विज्ञान, गृह विज्ञान, खड़िया, खोरठा, कुरमाली, कुड़ुख, दर्शनशास्त्र और प्राणीशास्त्र के अभ्यर्थियों का साक्षात्कार होगा। इनके साथ अंग्रेजी के क्रमांक 84 से 108, भूगोल के क्रमांक 156 से 185 और हिंदी के क्रमांक 215 से 244 तक के अभ्यर्थियों को बुलाया गया है। संबंधित क्षेत्रीय भाषाओं के अभ्यर्थियों की प्रक्रिया जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के अंतर्गत पूरी होगी। 
दूसरे दिन शुक्रवार, 23 अक्टूबर को रसायन विज्ञान, अर्थशास्त्र, इतिहास, गणित, नागपुरी, भौतिकी, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान, संस्कृत, संताली और उर्दू विषयों के साक्षात्कार निर्धारित हैं। इसी दिन अंग्रेजी के क्रमांक 109 से 133, भूगोल के क्रमांक 186 से 209 और हिंदी के क्रमांक 245 से 271 तक के अभ्यर्थियों को शामिल होना है। शनिवार, 24 अक्टूबर को अंग्रेजी के क्रमांक 134 से 155 के साथ वनस्पतिशास्त्र, हो, मुंडारी, पंचपरगनिया और समाजशास्त्र के अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया जाएगा।  अभ्यर्थियों को भरे हुए आवेदन पत्र की स्व-अभिप्रमाणित हार्ड कॉपी और अपनी पात्रता से संबंधित स्कोरकार्ड प्रस्तुत करना होगा। इनमें लागू श्रेणी के अनुसार यूजीसी या सीएसआईआर नेट-जेआरएफ, नेट-एलएस, नेट-पीएचडी, गेट अथवा एमफिल से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। जन्मतिथि के प्रमाण के लिए मैट्रिक का प्रमाणपत्र या अन्य मान्य साक्ष्य, स्नातकोत्तर की अंकतालिकाएं और पहचान पत्र भी साथ रखना होगा। आरक्षित श्रेणी तथा दिव्यांग अभ्यर्थियों को लागू प्रमाणपत्र लाने होंगे। सत्यापन के लिए मूल दस्तावेज जरूरी हैं।
विश्वविद्यालय के निर्देशों के अनुसार साक्षात्कार की निर्धारित तारीख बदलने के अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा। इसमें शामिल होने के लिए यात्रा भत्ता भी नहीं दिया जाएगा। अभ्यर्थियों को विषय के साथ अपना क्रमांक मिलाकर कार्यक्रम देखना चाहिए, क्योंकि अंग्रेजी, हिंदी और भूगोल के साक्षात्कार अलग-अलग दिनों में बांटे गए हैं। केवल विषय का नाम देखकर किसी भी दिन पहुंचने से निर्धारित अवसर छूट सकता है। दस्तावेज और पात्रता संबंधी शर्तों का पालन नहीं करने पर अभ्यर्थिता रद्द की जा सकती है। अंतिम मेधा सूची में शोध पात्रता परीक्षा के प्राप्तांक को 70 प्रतिशत और साक्षात्कार को 30 प्रतिशत भारांक दिया जाएगा। जिन अभ्यर्थियों के स्कोरकार्ड में केवल परसेंटाइल दर्ज है, उनके लिए साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के अनुपात में परीक्षा वाले हिस्से का भारांक निर्धारित करने की व्यवस्था बताई गई है। इस कारण साक्षात्कार प्रवेश प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। अभ्यर्थियों को अपने स्कोरकार्ड की सही प्रति और उससे जुड़े प्रमाणपत्र तैयार रखने होंगे। 
नामांकन के बाद कोर्स वर्क शुरू करने की तैयारी भी चल रही है। घोषित योजना के अनुसार इसकी शुरुआत दो जनवरी 2027 से होनी है। पहला पेपर सामान्य होगा, जबकि दूसरे और तीसरे पेपर की विषयवस्तु संबंधित विषय के अनुसार तय होगी। शोध निदेशालय ने स्नातकोत्तर विभागों के अध्यक्षों से इन दोनों पेपर का सिलेबस प्रारूप मांगा है। इसके आधार पर अंतिम पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा, ताकि चयनित शोधार्थियों का कोर्स वर्क निर्धारित समय से शुरू कराया जा सके। इस प्रवेश प्रक्रिया में कुछ वोकेशनल पाठ्यक्रमों के पात्र विद्यार्थियों को भी संबंधित विभागों के माध्यम से शोध का अवसर मिल रहा है। उदाहरण के लिए सीएनडी के विद्यार्थी गृह विज्ञान, एमसीए के विद्यार्थी गणित और ग्रामीण विकास के विद्यार्थी समाजशास्त्र विभाग से जुड़कर पीएचडी कर सकेंगे। यह अवसर संबंधित विषय और विभाग के संबंध पर निर्भर करेगा। वोकेशनल पाठ्यक्रम के अभ्यर्थियों को भी चयन प्रक्रिया में सफल होना होगा और संबंधित विभाग के अंतर्गत ही आगे की शोध प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
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