Jharkhand: चतरा जिले के टंडवा स्थित सीसीएल की बहुप्रतीक्षित चंद्रगुप्त कोल परियोजना से आखिरकार कोयले का डिस्पैच शुरू हो गया है। रविवार शाम से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत पहले दिन करीब 450 टन कोयला 15 हाइवा के माध्यम से एनटीपीसी नॉर्थ कर्णपुरा परियोजना को भेजा गया। कोयला परिवहन शुरू होने के साथ ही सीसीएल और एमडीओ कंपनी सुशी माइनिंग के अधिकारियों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि लंबे समय से उत्पादन के बावजूद डिस्पैच शुरू नहीं हो पा रहा था।
परियोजना में उत्पादन की शुरुआत 21 मार्च से हुई थी, जबकि 17 फरवरी से ओवरबर्डन हटाने का कार्य शुरू किया गया था। अब तक यहां लगभग 10 लाख टन कोयले का उत्पादन और 17 लाख क्यूबिक मीटर ओबी का निष्पादन किया जा चुका है। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों के साथ सहमति नहीं बनने के कारण कोयले का परिवहन रुका हुआ था, जिससे परियोजना प्रबंधन की चिंता बढ़ गई थी।
बाद में ग्रामीणों के साथ रोजगार और अन्य मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत हुई, जिसके बाद सहमति बनी और डिस्पैच शुरू हो सका। पहले दिन के सफल परिवहन ने परियोजना को नई दिशा दी है।
जानकारी के अनुसार फिलहाल करीब डेढ़ लाख टन कोयले की बुकिंग की गई है, जिसमें एक लाख टन एनटीपीसी नॉर्थ कर्णपुरा को और 50 हजार टन रोड सेल के जरिए आपूर्ति की जाएगी। इससे परियोजना की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
सीसीएल ने नए वित्तीय वर्ष में इस परियोजना से 4.5 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जिसे आगे बढ़ाकर 15 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक करने की योजना है। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना आने वाले समय में सीसीएल की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल होगी और क्षेत्रीय विकास में अहम भूमिका निभाएगी।
करीब 3331 एकड़ में फैली इस परियोजना में 527 मिलियन टन कोयले का विशाल भंडार मौजूद है। इसका संचालन 41 वर्षों की अवधि के लिए किया जा रहा है, जिसमें 25 वर्षों तक एमडीओ मोड के तहत सुशी माइनिंग को जिम्मेदारी दी गई है।
टंडवा और केरेडारी क्षेत्र में फैली यह परियोजना स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी। डिस्पैच शुरू होने के साथ अब उम्मीद जताई जा रही है कि परियोजना पूरी क्षमता के साथ गति पकड़ेगी और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।