RSS कार्यालय बम हमले मामले में NIA की बड़ी कार्रवाई

Update: 2026-07-17 04:27 GMT

रांची: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के रांची स्थित कार्यालय पर हुए बम हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की। एनआईए की अलग-अलग टीमों ने रांची और लोहरदगा जिले के छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी ने इस कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद करने का दावा किया है। फिलहाल एनआईए की जांच जारी है और बरामद सामग्री की जांच की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई 16 जून को रांची स्थित आरएसएस कार्यालय पर हुए कथित बम हमले से जुड़े मामले में की गई। एनआईए ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच अपने हाथ में ली थी। गुरुवार को सुबह से ही एजेंसी की कई टीमें सक्रिय हो गईं और रांची तथा लोहरदगा में चिन्हित स्थानों पर पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया।

एनआईए की एक टीम रांची के पत्थलकुदवा इलाके में पहुंची। यहां टीम ने सायम सुजान के किराए के मकान की तलाशी ली। अधिकारियों ने मकान के अंदर मौजूद दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस मामले से जुड़े लोगों के बीच किसी प्रकार का संपर्क या आपसी संबंध था या नहीं।

इसके अलावा लोहरदगा जिले में भी एनआईए ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की। एजेंसी की टीमें सुबह करीब चार बजे लोहरदगा पहुंचीं और पांच अलग-अलग घरों में तलाशी अभियान चलाया। सुरक्षा व्यवस्था के बीच की गई इस कार्रवाई में स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों की मदद ली गई। टीमों ने घरों में मौजूद लोगों से पूछताछ भी की और संदिग्ध वस्तुओं की जांच की।

सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान एनआईए को कुछ ऐसे दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य सामग्री मिली है, जिन्हें जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, एजेंसी ने बरामद सामग्री का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी जब्त वस्तुओं की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

आरएसएस कार्यालय पर हुए बम हमले के बाद जांच एजेंसियां लगातार मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई हैं। एनआईए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के पीछे कौन लोग शामिल थे, उनकी योजना क्या थी और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।

जांच एजेंसी की कार्रवाई से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी का उद्देश्य मामले में शामिल संदिग्धों के बारे में अधिक जानकारी जुटाना और उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित करना था। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि घटना को अंजाम देने के लिए किन संसाधनों का इस्तेमाल किया गया और आरोपियों को किसी बाहरी सहायता या नेटवर्क का समर्थन प्राप्त था या नहीं।

एनआईए आमतौर पर ऐसे मामलों में तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल फोन रिकॉर्ड, डिजिटल बातचीत, दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच करती है। इस मामले में भी एजेंसी इन सभी पहलुओं को खंगाल रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि बरामद सामग्री से जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

स्थानीय लोगों के अनुसार, गुरुवार सुबह अचानक सुरक्षा बलों और जांच एजेंसी की गतिविधियां बढ़ गईं। जिन इलाकों में छापेमारी की गई, वहां लोगों में उत्सुकता और चर्चा का माहौल रहा। हालांकि, सुरक्षा कारणों से अधिकारियों ने किसी भी तरह की जानकारी साझा करने से परहेज किया।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी संवेदनशील मामले में जांच एजेंसी द्वारा की जाने वाली छापेमारी का उद्देश्य अदालत में प्रस्तुत किए जा सकने वाले ठोस साक्ष्य जुटाना होता है। केवल छापेमारी के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका तय नहीं की जा सकती। जांच पूरी होने और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाती है।

एनआईए ने इससे पहले भी इस मामले में कई पहलुओं की जांच की है और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई है। गुरुवार की कार्रवाई को उसी जांच प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। एजेंसी अब बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करेगी।

फिलहाल आरएसएस कार्यालय बम हमले मामले में एनआईए की जांच जारी है। रांची और लोहरदगा में हुई ताजा छापेमारी के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि मामले से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि, जांच एजेंसी की ओर से अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

एनआईए अधिकारियों का कहना है कि मामले में जो भी व्यक्ति या समूह शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी का लक्ष्य घटना की पूरी साजिश का पता लगाना और सभी जिम्मेदार लोगों तक पहुंचना है।

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