Jharkhand : इंटरमीडिएट स्थानांतरण से 65 कॉलेजों के शिक्षक-कर्मचारियों पर संकट
Jharkhand झारखंड : सरकार द्वारा महाविद्यालयों में संचालित इंटरमीडिएट की पढ़ाई को चरणबद्ध तरीके से प्लस-टू विद्यालयों में स्थानांतरित किए जाने के बाद राज्य में एक बड़ा प्रशासनिक और शैक्षणिक संकट खड़ा हो गया है। इस फैसले का सीधा असर राज्य के 65 अंगीभूत महाविद्यालयों (Constituent Colleges) में कार्यरत शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों पर पड़ा है, जो अब अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
सरकारी निर्णय के तहत इंटरमीडिएट स्तर की पढ़ाई अब कॉलेजों से हटाकर प्लस-टू स्कूलों में स्थानांतरित की जा रही है, जिससे कॉलेजों में इस स्तर के छात्रों का नामांकन लगभग समाप्त हो गया है। पहले जहां इन कॉलेजों में बड़ी संख्या में छात्र इंटरमीडिएट शिक्षा के लिए दाखिला लेते थे, वहीं अब यह पूरी व्यवस्था स्कूल स्तर पर केंद्रित हो गई है।
इस बदलाव के चलते कॉलेजों में वर्षों से कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के सामने रोजगार और समायोजन का संकट खड़ा हो गया है। कई शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय से इंटरमीडिएट स्तर की शिक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन अब उनके भविष्य को लेकर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई है।
इसी तरह गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को भी चिंता सता रही है कि कॉलेजों में छात्र संख्या घटने के बाद उनके पदों और सेवाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा। कर्मचारियों का कहना है कि यदि इंटरमीडिएट सेक्शन पूरी तरह समाप्त कर दिया गया तो कई पदों पर सीधा असर पड़ेगा।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस तरह के बड़े बदलाव से पहले स्पष्ट पुनर्वास नीति और समायोजन योजना जरूरी थी, ताकि किसी भी वर्ग को असुरक्षा का सामना न करना पड़े।
फिलहाल स्थिति यह है कि कॉलेजों में इंटरमीडिएट शिक्षा बंद होने के बाद संसाधनों और मानव संसाधन दोनों का उपयोग अधूरा पड़ गया है। कई कॉलेज प्रशासन भी इस बदलाव के बाद संचालन संबंधी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।
शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द एक स्पष्ट नीति बनाकर प्रभावित शिक्षकों और कर्मचारियों के समायोजन या पुनर्नियोजन की व्यवस्था की जाए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।
इस पूरे मामले ने राज्य में शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर एक नई बहस छेड़ दी है।