धान बेचने वाले किसानों को बड़ी खुशखबरी, अब प्रति क्विंटल मिलेंगे 2550 रुपये
रांची। झारखंड के किसानों के लिए हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ी राहत देने की तैयारी की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए धान की सरकारी खरीद पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अतिरिक्त 109 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा की गई है। राज्य के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सोमवार, 26 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। पिछले वित्तीय वर्ष में किसानों के लिए 81 रुपये प्रति क्विंटल बोनस स्वीकृत किया गया था। इस आधार पर इस बार बोनस में 28 रुपये की बढ़ोतरी होगी। हालांकि कुछ विभागीय रिपोर्टों में पिछले बोनस की दर 84 रुपये बताई गई है। सरकार ने चालू खरीफ विपणन मौसम में 40 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। बोनस की बढ़ी हुई राशि के लिए आवश्यक वित्तीय और कैबिनेट स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है।
किसानों को एमएसपी के अलावा मिलेगा अतिरिक्त पैसा
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बताया कि राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना और खेती को आर्थिक रूप से लाभकारी बनाना है। इसी दिशा में धान खरीद पर मिलने वाले बोनस में बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। वहीं, ग्रेड-ए धान का समर्थन मूल्य 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित 109 रुपये का बोनस जोड़ने पर सामान्य धान की कुल खरीद दर 2,550 रुपये प्रति क्विंटल होगी। इसी तरह ग्रेड-ए धान के लिए किसानों को 2,570 रुपये प्रति क्विंटल मिलेंगे।
40 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य
झारखंड सरकार ने खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए कुल 40 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पहले राज्य में 50 लाख क्विंटल धान खरीदने की योजना थी, लेकिन विभागीय समीक्षा के बाद इसे संशोधित किया गया।
मंत्री इरफान अंसारी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा योजनाओं की जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
विभागीय आकलन के मुताबिक, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के केंद्रीय पूल के लिए लगभग 19.60 लाख क्विंटल धान की आवश्यकता है। वहीं, झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के लिए करीब 19.79 लाख क्विंटल धान की जरूरत बताई गई है।
इन दोनों आवश्यकताओं को मिलाकर लगभग 39.39 लाख क्विंटल धान की जरूरत होती है। इसी आधार पर सरकार ने खरीद का लक्ष्य 40 लाख क्विंटल रखने का प्रस्ताव तैयार किया है।
बोनस भुगतान पर खर्च होंगे 43.60 करोड़ रुपये
राज्य सरकार ने धान खरीद के लक्ष्य के अनुसार किसानों को बोनस देने के लिए आवश्यक राशि का भी आकलन किया है।
यदि सरकार निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 40 लाख क्विंटल धान की खरीद करती है, तो 109 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने के लिए लगभग 43 करोड़ 60 लाख रुपये की आवश्यकता होगी।
इस राशि की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव योजना प्राधिकृत समिति के समक्ष रखा गया है। आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद बोनस भुगतान की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी किसानों को बोनस का भुगतान एकमुश्त करने की योजना है। इसका उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाना और किसानों को निर्धारित राशि उपलब्ध कराना है।
सभी 24 जिलों में होगी धान की सरकारी खरीद
राज्य सरकार ने सभी 24 जिलों में धान खरीद की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जिला स्तर पर खरीद केंद्रों की व्यवस्था, किसानों के पंजीकरण और धान की गुणवत्ता जांच जैसी प्रक्रियाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग आवश्यक व्यवस्थाएं करेगा। किसानों को अपनी उपज बेचने के दौरान अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े, इस पर भी जोर दिया गया है।
किसानों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे निर्धारित पात्रता और खरीद केंद्रों से संबंधित निर्देशों का पालन करें।
राज्य सरकार की कोशिश है कि अधिक से अधिक पात्र किसानों को सरकारी खरीद व्यवस्था का लाभ मिल सके और उन्हें अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े।
दूसरे राज्यों से आने वाले धान पर रहेगी निगरानी
झारखंड सरकार ने धान खरीद प्रक्रिया में पड़ोसी राज्यों से आने वाली उपज को लेकर भी सतर्कता बरतने का फैसला किया है।
मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से धान की आवक पर नियंत्रण के उपाय किए जाएंगे।
उनके मुताबिक, पिछले खरीद मौसम में एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था के कारण पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में किसान झारखंड में अपनी उपज बेचने पहुंचे थे।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की सरकारी धान खरीद व्यवस्था और बोनस का लाभ निर्धारित पात्रता के अनुसार किसानों को मिले।
इसके लिए खरीद केंद्रों पर आवश्यक निगरानी और सत्यापन व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता
हेमंत सोरेन सरकार का कहना है कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
धान झारखंड की प्रमुख खरीफ फसलों में से एक है। राज्य के बड़े हिस्से में किसान धान की खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में समर्थन मूल्य के अतिरिक्त बोनस मिलने से किसानों की आय में बढ़ोतरी होने की संभावना है।
खेती के दौरान किसानों को बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और परिवहन सहित कई प्रकार के खर्च उठाने पड़ते हैं। इन खर्चों में वृद्धि होने के कारण किसानों के लिए अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करना महत्वपूर्ण होता है।
सरकार का मानना है कि अतिरिक्त बोनस से किसानों को इन खर्चों की भरपाई करने में कुछ मदद मिलेगी।
कैबिनेट की मंजूरी पर टिकी नजर
धान बोनस में बढ़ोतरी का प्रस्ताव मंगलवार, 27 अक्टूबर को होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विचार के लिए रखे जाने की जानकारी सामने आई है।
विभागीय प्रस्ताव में पिछले बोनस की राशि 84 रुपये और नई राशि 109 रुपये बताई गई है। इस आधार पर प्रस्तावित बढ़ोतरी 25 रुपये प्रति क्विंटल है। हालांकि पिछले वित्तीय वर्ष के लिए स्वीकृत 81 रुपये के आंकड़े को आधार मानने पर अंतर 28 रुपये होता है।
इसलिए बोनस बढ़ोतरी की अंतिम तुलना और लागू दर को लेकर मंत्रिमंडल के निर्णय तथा आधिकारिक आदेश का इंतजार रहेगा।
फिलहाल किसानों के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने एमएसपी के ऊपर अतिरिक्त 109 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की पहल की है। प्रस्ताव लागू होने पर सामान्य धान के लिए कुल 2,550 रुपये और ग्रेड-ए धान के लिए 2,570 रुपये प्रति क्विंटल की दर किसानों को मिल सकेगी।