लातेहार: मित्रों के आग्रह पर पहला विधानसभा चुनाव लड़ने वाले ब्रज मोहन राम अब ओडिशा के राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 12 अक्टूबर 2026 को उनकी नियुक्ति की घोषणा की। बिहार विधानसभा और तीन बार लोकसभा के सदस्य रहे ब्रज मोहन राम के सार्वजनिक जीवन में यह नई जिम्मेदारी है। राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति के अनुसार, उनकी नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी। इसलिए नियुक्ति की घोषणा और कार्यभार संभालने की प्रक्रिया अलग चरण हैं। 
उनके शुरुआती चुनाव की कहानी में मित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथियों ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया और प्रचार की जिम्मेदारियाँ बाँट लीं। कोई भाषण तैयार करता था, कोई प्रचार की जीप चलाता था और कोई उसके लिए डीजल का खर्च जुटाता था। अन्य साथी गांवों में संपर्क और मतदान केंद्रों की तैयारी में लगे रहते थे। सीमित संसाधनों के बीच इसी सहयोग से उन्होंने विधानसभा चुनाव का अभियान आगे बढ़ाया। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत से जुड़ा यह प्रसंग आज उनकी नई नियुक्ति के साथ फिर सामने आया है। 
ब्रज मोहन राम का जन्म एक जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार के पलामू जिले के चंदवा में हुआ था। चंदवा अब झारखंड के लातेहार जिले में आता है। उनके पिता अर्जुन राम बैठा और माता चैती देवी थीं। उन्होंने लोहरदगा के बीएस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। उनकी राजनीति की शुरुआत अविभाजित बिहार में हुई और बाद में उन्होंने पलामू संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 
विधानसभा से संसद तक उनकी यात्रा में लगातार तीन लोकसभा चुनावों की जीत प्रमुख पड़ाव रही। वर्ष 1996 में वह 11वीं लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इसके बाद 1998 में 12वीं लोकसभा और 1999 में 13वीं लोकसभा के लिए दोबारा चुने गए। इस तरह उन्होंने तीन अलग-अलग लोकसभाओं में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। संसद की सदस्य परिचय संबंधी जानकारी में भी उनके तीसरे कार्यकाल का उल्लेख है। अब पूर्व सांसद के तौर पर उनके अनुभव के साथ राज्यपाल पद की नई जिम्मेदारी जुड़ने जा रही है। 
चुनावी राजनीति में आगे बढ़ने के बाद भी चंदवा के सामाजिक कार्यों से उनका संबंध बना रहा। वह छठ व्रतियों की सेवा के लिए स्थापित विवेकानंद किशोर संस्थान के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे हैं। लगभग 55 वर्ष पुरानी इस संस्था से उनका जुड़ाव रहा है। चंदवा में शवदाह गृह के निर्माण कार्य में भी उनकी भूमिका बताई गई है। इन गतिविधियों में भागीदारी उनके सार्वजनिक जीवन के उस हिस्से को सामने लाती है, जो स्थानीय समाज और उसकी जरूरतों से जुड़ा हुआ है। 
ओडिशा में वह हरि बाबू कंभमपति का स्थान लेंगे। कंभमपति ने तीन जनवरी 2025 को राज्यपाल का कार्यभार संभाला था। नई नियुक्ति पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ब्रज मोहन राम को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने समृद्ध, समावेशी और विकसित ओडिशा के निर्माण के प्रयासों में उनके मार्गदर्शन तथा सहयोग की अपेक्षा जताई। उन्होंने नए राज्यपाल के सफल कार्यकाल की कामना करते हुए सेवा की भावना और प्रदेश के लोगों की आकांक्षाओं को मजबूत करने की बात भी कही। 
ब्रज मोहन राम की नियुक्ति छह राज्यों के राज्यपालों से संबंधित घोषणाओं का हिस्सा है। इसी विज्ञप्ति में ओम प्रकाश माथुर को केरल, राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु, सुधा यादव को कर्नाटक, ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड और दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त करने की जानकारी दी गई। सभी नियुक्तियों के प्रभावी होने के लिए संबंधित पदों का कार्यभार ग्रहण करने की शर्त रखी गई है। ब्रज मोहन राम के लिए यह घोषणा विधानसभा और संसद में प्रतिनिधित्व के बाद राज्यपाल पद तक पहुंचने का नया पड़ाव है। President of India
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