रांची। झारखंड के जंगलों से होकर गुजरने वाले रेल मार्गों पर हाथियों की बढ़ती आवाजाही अब ट्रेनों की रफ्तार पर असर डालने लगी है। पिछले 24 घंटे में राज्य के दो अलग-अलग रेलखंडों पर हाथियों के रेलवे ट्रैक पर पहुंचने के कारण ट्रेनों का परिचालन रोकना पड़ा। वन्यजीवों की सुरक्षा और किसी बड़े हादसे को टालने के लिए रेलवे और वन विभाग को तत्काल कदम उठाने पड़े।

हाथियों की मौजूदगी से प्रभावित ट्रेनों में नई दिल्ली-भुवनेश्वर तेजस राजधानी एक्सप्रेस भी शामिल रही। जंगल क्षेत्र से गुजरने के दौरान ट्रैक पर हाथियों के झुंड के आने की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा कारणों से ट्रेन को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। रेलवे अधिकारियों ने स्थिति सामान्य होने के बाद ही परिचालन बहाल किया।

झारखंड में बड़ी संख्या में जंगल और हाथियों के प्राकृतिक कॉरिडोर मौजूद हैं। कई रेलखंड ऐसे हैं, जो घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं। इन इलाकों में अक्सर हाथियों का झुंड भोजन और पानी की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाता है। इसी दौरान कई बार वे रेलवे ट्रैक या सड़क मार्ग तक पहुंच जाते हैं।

वन्यजीव सुरक्षा बनी रेलवे के लिए चुनौती

रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ट्रैक पर अचानक आने वाले हाथियों को समय रहते रोका जाए और साथ ही ट्रेनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। हाथी जैसे बड़े वन्यजीव से टक्कर होने की स्थिति में न केवल उनकी जान को खतरा होता है, बल्कि ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।

इसी वजह से रेलवे और वन विभाग के बीच समन्वय बनाकर ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जाती है। हाथियों की आवाजाही वाले इलाकों में कई जगहों पर वन विभाग की टीमों को अलर्ट रखा जाता है।

दो रेलखंडों पर प्रभावित हुआ परिचालन

पिछले 24 घंटे में झारखंड के दो रेलखंडों पर हाथियों के ट्रैक पर आने से ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई। सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारियों ने सावधानी बरतते हुए ट्रेनों की गति कम कर दी और कुछ ट्रेनों को रोक दिया गया।

रेलवे कर्मचारियों और वन विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी। जब हाथियों का झुंड ट्रैक से सुरक्षित दूरी पर चला गया, तब ट्रेनों का संचालन फिर से शुरू किया गया।

हालांकि इस दौरान यात्रियों को कुछ समय के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों को ट्रेन के रुकने का कारण पता नहीं चल पाया, लेकिन बाद में रेलवे की ओर से सुरक्षा कारणों की जानकारी दी गई।

हाथियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर की जरूरत

वन विशेषज्ञों का कहना है कि हाथियों के प्राकृतिक रास्तों में मानवीय गतिविधियां बढ़ने से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। जंगलों के बीच से गुजरने वाले रेल मार्गों पर हाथियों की आवाजाही को देखते हुए विशेष प्रबंधन की जरूरत है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों के पारंपरिक मार्गों की पहचान कर वहां चेतावनी प्रणाली, निगरानी कैमरे और अन्य सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाना चाहिए। इससे हाथियों और इंसानों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

रेलवे ने बढ़ाई सतर्कता

हाथियों की लगातार बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए रेलवे ने भी संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई है। लोको पायलटों को ऐसे क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए जाते हैं। साथ ही वन विभाग से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर ट्रेनों की गति और संचालन में बदलाव किया जाता है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। वन्यजीवों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर तुरंत एहतियाती कदम उठाए जाते हैं, ताकि किसी भी दुर्घटना को रोका जा सके।

झारखंड में जंगल और रेल नेटवर्क के बीच संतुलन बनाना लगातार चुनौती बनता जा रहा है। हाथियों की आवाजाही बढ़ने के साथ रेलवे, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को मिलकर ऐसे उपाय करने होंगे, जिससे ट्रेनों का परिचालन भी सुचारू रहे और वन्यजीवों की सुरक्षा भी बनी रहे।

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