झारखंड के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर के 56 पदों पर होगी संविदा नियुक्ति
रांची : झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्य के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्राध्यापक (प्रोफेसर) के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग की ओर से प्रोफेसर के कुल 56 पदों पर संविदा आधारित नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। इन पदों पर योग्य अभ्यर्थियों का चयन वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से किया जाएगा। इंटरव्यू का आयोजन तीन अगस्त को रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के प्रशासनिक भवन में किया जाएगा। इंटरव्यू सुबह 10:30 बजे से शुरू होगा।
सरकार की ओर से जारी विज्ञापन के अनुसार, यह नियुक्तियां राज्य के पांच प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में की जाएंगी। इनमें मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एमएमसीएच), पलामू, शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, धनबाद, महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, जमशेदपुर, फुलो-झानो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, दुमका तथा शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, हजारीबाग शामिल हैं।
इन मेडिकल कॉलेजों में विभिन्न विभागों के लिए प्रोफेसर स्तर के चिकित्सकों की आवश्यकता को देखते हुए यह नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई है। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को दूर करना और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। लंबे समय से कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ शिक्षकों के पद रिक्त रहने के कारण शैक्षणिक गतिविधियों और विभागीय कार्यों पर असर पड़ रहा था। नई नियुक्तियों से इन संस्थानों में पढ़ाई और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
एमएमसीएच पलामू समेत पांच संस्थानों में होगी नियुक्ति
मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, पलामू में भी प्रोफेसर के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया इसी नियुक्ति अभियान के तहत की जाएगी। पलामू समेत राज्य के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने संविदा के आधार पर नियुक्ति का निर्णय लिया है।
सरकार की ओर से समय-समय पर मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों और शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे पदों पर पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की मौजूदगी राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों के लिए भी आवश्यक होती है। ऐसे में रिक्त पदों को भरना सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वॉक-इन-इंटरव्यू से होगा चयन
विज्ञापन के मुताबिक, इच्छुक और योग्य अभ्यर्थियों को निर्धारित तिथि और समय पर रिम्स प्रशासनिक भवन पहुंचकर इंटरव्यू में शामिल होना होगा। चयन प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र, अनुभव प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। उम्मीदवारों को सभी मूल प्रमाणपत्रों के साथ उनकी छायाप्रति भी साथ लाने की आवश्यकता होगी।
संविदा नियुक्ति होने के कारण चयनित अभ्यर्थियों की सेवा विभाग द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों के आधार पर होगी। नियुक्त प्रोफेसरों को संबंधित मेडिकल कॉलेजों में विभागीय जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इससे मेडिकल छात्रों को बेहतर शैक्षणिक मार्गदर्शन और क्लीनिकल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की पहल
झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और पुराने संस्थानों के विस्तार के साथ चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बदलाव हो रहे हैं। हालांकि, शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण कई बार मेडिकल कॉलेजों को निर्धारित मानकों को पूरा करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल को राज्य की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञ प्रोफेसरों की नियुक्ति से न केवल मेडिकल छात्रों की पढ़ाई बेहतर होगी, बल्कि अस्पतालों में मरीजों के इलाज और शोध कार्यों को भी गति मिलने की संभावना है।
एमएमसीएच पलामू सहित पांचों मेडिकल कॉलेजों में होने वाली यह नियुक्तियां राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए अहम मानी जा रही हैं। विभाग को उम्मीद है कि इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक कम होगी और चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।