रांची। झारखंड सरकार ने शहरी क्षेत्रों में सड़कों, मोहल्लों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों के नामकरण को लेकर बड़ा बदलाव किया है। राज्य सरकार ने झारखंड नगर निकाय (सड़कों, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों का नामकरण और क्रमांकन) नियम, 2026 का ड्राफ्ट तैयार किया है। नई नियमावली के लागू होने के बाद अब नगर निकाय अपने स्तर पर किसी सड़क, मोहल्ले या सार्वजनिक स्थान का नाम तय नहीं कर सकेंगे। नामकरण की अंतिम मंजूरी राज्य स्तरीय नामकरण प्राधिकरण देगा।
नगर विकास एवं आवास विभाग के अधीन गठित होने वाला यह प्राधिकरण सड़कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के नाम तय करने के साथ-साथ पुराने नामों में बदलाव का अधिकार भी रखेगा। सरकार ने इस नियमावली का प्रारूप जारी कर आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। यह नियम सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों पर लागू होगा।
नई नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि स्थानीय निकाय नामकरण के लिए प्रस्ताव तैयार कर सकते हैं, लेकिन उसे लागू करने से पहले राज्य स्तरीय नामकरण प्राधिकरण की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। यदि किसी नाम को लेकर नगर निकाय और प्राधिकरण के बीच मतभेद होता है तो अंतिम निर्णय प्राधिकरण का ही मान्य होगा।
सरकार ने नामकरण के लिए कई प्रतिबंध भी तय किए हैं। अब ऐसे नाम नहीं रखे जा सकेंगे जो किसी जाति, धर्म, समुदाय, भाषा, लिंग या वर्ग के प्रति अपमानजनक हों। जाति-सूचक, सांप्रदायिक भावना भड़काने वाले या विवाद पैदा करने वाले नामों पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके अलावा अश्लील या ऐसे नाम जो समाज में वैमनस्य बढ़ाने का काम करते हैं, उन्हें भी प्रतिबंधित किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी सड़क या मोहल्ले का नाम पहले से ही उसी शहर या आसपास के क्षेत्र में मौजूद है और उससे डाक सेवा, पुलिस व्यवस्था या आपातकालीन सेवाओं में भ्रम की स्थिति बनती है, तो ऐसे नामों को भी बदला जा सकता है।
सरकार ने जीवित व्यक्तियों के नाम पर सड़क या मोहल्ले का नाम रखने के लिए भी विशेष नियम बनाए हैं। किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर नामकरण करने से पहले राज्य सरकार की अनुमति लेना जरूरी होगा। वहीं ऐसे व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा, जिसे नैतिक पतन या राज्य विरोधी अपराध में दोषी पाया गया हो।
विवादित और आपत्तिजनक नामों की पहचान के लिए राज्य के सभी शहरी निकायों को 30 दिनों के भीतर सर्वेक्षण दल बनाना होगा। यह दल अपने-अपने क्षेत्रों में सड़कों, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों के नामों की जांच करेगा। सर्वेक्षण के बाद 90 दिनों के अंदर रिपोर्ट तैयार कर संबंधित अधिकारियों को सौंपनी होगी। इसके बाद नगर निकाय अपनी सिफारिशें राज्य स्तरीय नामकरण एवं युक्तिकरण समिति को भेजेंगे।
नई सड़क या मोहल्ला बनने की स्थिति में भी प्रक्रिया तय की गई है। संबंधित नगर निकाय को 90 दिनों के भीतर नाम का प्रस्ताव तैयार करना होगा। यह प्रस्ताव पहले नगर निकाय की परिषद से पारित होगा और फिर नामकरण प्राधिकरण के पास भेजा जाएगा। प्राधिकरण की मंजूरी मिलने के बाद ही नया नाम आधिकारिक रूप से लागू किया जा सकेगा।
किसी पुराने नाम को बदलने के लिए भी नियम बनाए गए हैं। इसके लिए संबंधित वार्ड के कम से कम एक-चौथाई पंजीकृत मतदाताओं का प्रस्ताव जरूरी होगा। हालांकि नामकरण प्राधिकरण अपने स्तर से भी किसी सड़क या मोहल्ले का नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
राज्य स्तरीय नामकरण प्राधिकरण में कई विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। इसके अध्यक्ष नगर प्रशासन निदेशक होंगे। इसके अलावा संबंधित जिले के उपायुक्त या उनके द्वारा नामित अधिकारी, नगर निकाय के कमिश्नर या कार्यपालक पदाधिकारी, गृह विभाग के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी, संबंधित विभाग के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी और नगर विकास विभाग के संयुक्त सचिव या उप सचिव स्तर के अधिकारी सदस्य सचिव के रूप में शामिल होंगे।
सरकार का कहना है कि नई नियमावली का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में नामकरण प्रक्रिया को व्यवस्थित, पारदर्शी और विवाद मुक्त बनाना है। इसके जरिए ऐसे नामों को हटाया जाएगा जो सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करते हैं और शहरों में एकरूपता के साथ बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।