हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले के चरही थाना क्षेत्र से अगवा किए गए निजी कंपनी के मैनेजर भास्कर कुमार को पुलिस ने चंद घंटों के भीतर सुरक्षित बरामद कर लिया। पुलिस के अनुसार, उन्हें कोडरमा जिले के चंदवारा थाना क्षेत्र से छुड़ाया गया। मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अपहरण में इस्तेमाल किए जाने के संदेह में एक क्रेटा और एक स्कॉर्पियो भी जब्त की गई हैं। घटना के संबंध में चरही थाने में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, घटना शनिवार, 31 अक्टूबर की रात करीब साढ़े आठ बजे तापिन साउथ सीसीएल परियोजना क्षेत्र में हुई। करीब 35 वर्षीय भास्कर कुमार एनईपीएल आउटसोर्सिंग कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। आरोप है कि उन्हें जबरन वाहन में बैठाकर वहां से ले जाया गया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की। यहां स्पष्ट है कि भास्कर आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मचारी हैं; उन्हें सीधे सीसीएल का अधिकारी बताना सही नहीं होगा।
अपहरण की जानकारी मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। इसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ चरही थाना पुलिस और तकनीकी शाखा के कर्मियों को शामिल किया गया। टीम ने घटनास्थल से उपलब्ध जानकारी जुटाई और संदिग्ध वाहनों के बारे में पड़ताल की। पुलिस के अनुसार, तकनीकी तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से कार्रवाई की दिशा तय करने में मदद मिली। स्थानीय स्तर पर पूछताछ भी की गई। इसके बाद अलग-अलग इलाकों में छापेमारी शुरू हुई।
जांच के दौरान पुलिस को एक काले रंग की क्रेटा और स्कॉर्पियो के इस्तेमाल की जानकारी मिली। कार्रवाई में स्कॉर्पियो मुफस्सिल थाना क्षेत्र से और क्रेटा चंदवारा थाना क्षेत्र से बरामद की गई। पुलिस ने इसी अभियान के दौरान भास्कर कुमार को सुरक्षित छुड़ा लिया। अधिकारियों के मुताबिक, घटना की सूचना मिलने के बाद तेजी से की गई कार्रवाई से आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली। हालांकि, बरामदगी में लगे समय की सटीक अवधि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं बताई गई है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजेश यादव, विक्की कुमार, आनंद कुमार मेहता, दिलीप प्रसाद मेहता और मनीष कुमार के रूप में बताई गई है। ये हजारीबाग जिले के चौपारण, ईचाक और मुफस्सिल थाना क्षेत्रों से संबंधित हैं। पुलिस का आरोप है कि पांचों की अपहरण की घटना में भूमिका रही। हालांकि, प्रत्येक आरोपी ने क्या जिम्मेदारी निभाई और घटना में उसकी संलिप्तता के कौन-से साक्ष्य मिले हैं, इसका विस्तृत अधिकृत विवरण उपलब्ध नहीं है। आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
मामले में दो वाहनों के अलावा एक पेन ड्राइव बरामद होने की जानकारी भी सामने आई है। उसमें मौजूद सामग्री और उसका घटना से संबंध फिलहाल स्पष्ट नहीं किया गया है। इसलिए पेन ड्राइव में किसी खास रिकॉर्डिंग, लेनदेन या अन्य अपराध का प्रमाण मिलने का दावा नहीं किया जा सकता। पुलिस जांच में जब्त वस्तुओं की भूमिका का सत्यापन किया जाएगा। वाहन बरामद होने के साथ यह स्थापित करना भी महत्वपूर्ण होगा कि घटना के समय उनका इस्तेमाल किसने और किस प्रकार किया।
एक स्थानीय रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से अपहरण के पीछे वाहन किराये के बकाया भुगतान का विवाद बताया गया है। उसके अनुसार, आरोपियों के वाहन आउटसोर्सिंग कंपनी के काम में लगाए गए थे और भुगतान को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि मैनेजर को बंधक बनाकर कंपनी से रकम वसूलने की योजना थी। हालांकि, बकाया राशि, संबंधित अनुबंध और कंपनी का पक्ष उपलब्ध विवरण में स्पष्ट नहीं है। इसलिए इस कथित मकसद को जांच में सामने आए पुलिस के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
चरही थाने में कांड संख्या 88/26 के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। एक नवंबर को प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया चल रही थी। इसके बाद अदालत ने क्या आदेश दिया, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इसी तरह किसी आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड या दूसरे गिरोह से संबंध की जानकारी भी सामने नहीं आई है। फिलहाल कार्रवाई का प्रमुख परिणाम मैनेजर की सुरक्षित बरामदगी और पांच लोगों की गिरफ्तारी है।