गुमला। पालकोट प्रखंड कार्यालय में गुरुवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बीपीओ हरीश प्रजापति को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। बीपीओ पर तालाब निर्माण योजना के काम को आगे बढ़ाने के बदले लाभुक से 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप है।
ACB की कार्रवाई के बाद प्रखंड कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर बीपीओ को पकड़ा। गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम आरोपी अधिकारी को अपने साथ ले गई और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी।
जानकारी के अनुसार, पालकोट मुस्लिम मोहल्ला निवासी मो. सहबूदिन मियां के नाम वित्तीय वर्ष 2021-22 में तालाब निर्माण योजना स्वीकृत हुई थी। योजना के तहत 100×100 फीट के तालाब का निर्माण कराया जाना था।
लाभुक योजना का काम शुरू कराने और आगे की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए लगातार प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगा रहा था। आरोप है कि इसी दौरान बीपीओ हरीश प्रजापति ने योजना से संबंधित कार्य को आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत की मांग की।
लाभुक ने जब रिश्वत देने से इनकार किया तो उसने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से कर दी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की जांच की और आरोपों की पुष्टि के बाद कार्रवाई की योजना बनाई।
एसीबी की टीम ने गुरुवार को प्रखंड कार्यालय में जाल बिछाया। तय योजना के अनुसार लाभुक को रिश्वत की रकम लेकर बीपीओ के पास भेजा गया। जैसे ही बीपीओ ने 10 हजार रुपये लिए, एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। एसीबी की टीम ने आरोपी अधिकारी से पूछताछ की और जरूरी दस्तावेजों की जांच की।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में रिश्वत मांगने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। लोगों से अपील की जाती है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी काम के बदले रिश्वत मांगता है तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित जांच एजेंसी को दें।
तालाब निर्माण योजना ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और कृषि विकास के उद्देश्य से चलाई जाती है। ऐसे में योजना का लाभ दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगना गंभीर मामला माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कई बार ग्रामीणों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस दौरान कुछ कर्मचारी और अधिकारी गलत तरीके से पैसे की मांग करते हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है।
एसीबी की कार्रवाई के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई से सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।
अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार बीपीओ के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। आगे की जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या आरोपी अधिकारी पहले भी किसी अन्य मामले में रिश्वत की मांग कर चुका है।
इस मामले में एसीबी टीम आरोपी के बैंक खातों, संपत्ति और अन्य गतिविधियों की भी जांच कर सकती है। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
सरकारी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में भ्रष्टाचार के मामलों से योजनाओं की गुणवत्ता और लाभार्थियों के भरोसे पर असर पड़ता है।
पालकोट प्रखंड कार्यालय में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि रिश्वतखोरी के खिलाफ जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। एसीबी ने लोगों से अपील की है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएं और शिकायत करने से न डरें।
फिलहाल बीपीओ हरीश प्रजापति एसीबी की हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है।