झारखण्ड: गोड्डा जिले के ठाकुरगंगटी प्रखंड स्थित भगैया क्षेत्र के तसर सिल्क उत्पादकों और बुनकरों के लिए बड़ी पहल की गई है। नाबार्ड की महाप्रबंधक दीपमाला घोष ने भगैया में तसर सिल्क उत्पादक एवं व्यापार कंपनी (ओएफपीओ) का विधिवत उद्घाटन किया। इस नई पहल का उद्देश्य तसर उत्पादकों, बुनकरों और शिल्पकारों को संगठित कर उन्हें बेहतर बाजार, आधुनिक तकनीक और वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
उद्घाटन समारोह का आयोजन गणेश पीस फाउंडेशन की ओर से किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों का तसर शिल्पकारों ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद दीपमाला घोष और अन्य अतिथियों ने तसर सिल्क उत्पादक एवं व्यापार कंपनी का शुभारंभ किया।
समारोह को संबोधित करते हुए नाबार्ड की महाप्रबंधक दीपमाला घोष ने कहा कि उत्पादक कंपनियां केवल व्यापारिक संस्थाएं नहीं होतीं, बल्कि ग्रामीण आर्थिक बदलाव का मजबूत माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड का तसर सिल्क अपनी गुणवत्ता और विशेष पहचान के लिए देश और दुनिया में जाना जाता है। अगर तसर उत्पादकों को एक संगठित मंच देकर उन्हें गुणवत्ता सुधार, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बेहतर विपणन से जोड़ा जाए तो हजारों परिवारों की आय में बड़ा सुधार हो सकता है।
उन्होंने कहा कि भगैया तसर सिल्क उत्पादक एवं व्यापार कंपनी बुनकरों और शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और तसर कारोबार को नई गति मिलेगी।
गणेश पीस फाउंडेशन के अध्यक्ष ने बताया कि इस उत्पादक कंपनी के माध्यम से तसर उत्पादकों, बुनकरों और कारीगरों को एक साथ जोड़ा जाएगा। कंपनी उन्हें आधुनिक तकनीक, वित्तीय सेवाएं, मूल्य संवर्धन और बाजार उपलब्ध कराने में सहायता करेगी। इससे छोटे उत्पादकों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर कीमत मिल सकेगी और वे बड़े बाजार से जुड़ पाएंगे।
कार्यक्रम में डीडीएम नाबार्ड ने कंपनी की स्थापना के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल स्थानीय तसर उत्पादकों को संगठित व्यावसायिक मंच उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद करेगी।
नाबार्ड महाप्रबंधक ने महिला स्वयं सहायता समूहों, जनजातीय समुदायों और युवा उद्यमियों की भागीदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं को उत्पादन एवं व्यापार से जोड़ने से आर्थिक विकास को नई दिशा मिल सकती है। नाबार्ड उत्पादक संगठनों को क्षमता विकास, संस्थागत मजबूती, वित्तीय समावेशन और बाजार संपर्क के लिए लगातार सहयोग देता रहेगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि भगैया तसर सिल्क उत्पादक एवं व्यापार कंपनी आने वाले समय में झारखंड के तसर क्षेत्र के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है। इससे ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक ने भी उत्पादक कंपनी के लिए बैंकिंग सेवाओं, ऋण सुविधाओं और अन्य वित्तीय योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने संस्था को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर तसर उत्पादकों, महिला स्वयं सहायता समूहों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय के लोगों के साथ खुली परिचर्चा भी आयोजित की गई। इसमें तसर उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, वित्तीय सहायता और संस्थागत विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
नई उत्पादक कंपनी के गठन से भगैया क्षेत्र के तसर बुनकरों को उम्मीद है कि अब उनके उत्पादों को बेहतर बाजार मिलेगा और उनकी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त हो सकेगा। यह पहल न केवल तसर उद्योग को मजबूत करेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देने में सहायक होगी।