Jammu.जम्मू: गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) जम्मू में हाल ही में न्यूरोसर्जरी क्षेत्र के नवीनतम तकनीकी ज्ञान और कौशल साझा करने के लिए कॉन्फ्रेंस और हैंड्स-ऑन वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य न्यूरोसर्जरी में उन्नत तकनीकों पर प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।
कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों से कई विशेषज्ञ न्यूरोसर्जन, मेडिकल फैकल्टी और छात्रों ने भाग लिया। कॉन्फ्रेंस में न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में नवीनतम उपकरण, न्यूरोइमेजिंग तकनीक और शल्य चिकित्सा पद्धतियों पर चर्चा की गई।
कार्यशाला में डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण (Hands-on Training) दिया गया। इसमें न्यूरोसर्जरी के विभिन्न सर्जिकल मॉडल और उपकरणों का उपयोग कर मॉडल और सिमुलेटर पर अभ्यास कराया गया। यह प्रशिक्षण विशेष रूप से उन डॉक्टरों और छात्रों के लिए फायदेमंद रहा, जो न्यूरोसर्जरी के जटिल मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
जीएमसी प्रशासन ने बताया कि यह आयोजन न केवल चिकित्सकीय कौशल बढ़ाने के लिए बल्कि ज्ञान साझा करने और नवीनतम तकनीकों को अपनाने के लिए भी महत्वपूर्ण था। आयोजकों ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों को सर्जिकल निर्णय लेने, तकनीकी दक्षता और पेशेवर कौशल में सुधार करने का अवसर प्रदान करती हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने कहा कि न्यूरोसर्जरी लगातार विकसित हो रहा क्षेत्र है, और इसके लिए नवीनतम तकनीकी प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव बेहद जरूरी हैं। उन्होंने जीएमसी जम्मू की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सर्जिकल मानकों और दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।
एक वरिष्ठ न्यूरोसर्जन ने कहा, “Hands-on वर्कशॉप और लाइव डेमो सत्र से छात्रों और चिकित्सकों को वास्तविक सर्जिकल परिदृश्य का अनुभव मिलता है। यह प्रशिक्षण उन्हें जटिल न्यूरोसर्जिकल केसों से निपटने में आत्मविश्वास देता है।”
कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप के दौरान उपस्थित छात्रों और युवाओं ने इस कार्यक्रम की उच्च गुणवत्ता और व्यावहारिक अनुभव की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से उन्हें अपने पेशेवर कौशल को बढ़ाने और मरीजों के लिए बेहतर उपचार प्रदान करने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, जीएमसी जम्मू में आयोजित यह न्यूरोसर्जरी कॉन्फ्रेंस और हैंड्स-ऑन वर्कशॉप चिकित्सकीय शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस आयोजन ने न केवल ज्ञान साझा करने का अवसर दिया, बल्कि न्यूरोसर्जरी में आधुनिक तकनीकों और नवाचारों को अपनाने की दिशा में भी मदद की।