Jammu and Kashmir श्रीनगर में सोमवार से शुरू होने वाले जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरद सत्र में काफी गहमागहमी रहने की उम्मीद है। विपक्षी दल बेरोजगारी, जरूरी सार्वजनिक सेवाओं की कमी और कामकाज व जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार को घेरने की तैयारी कर रहे हैं। यह सत्र 21 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगा और इसमें 10 दिनों के दौरान सात बैठकें होंगी। सत्र के पहले दिन की कार्यवाही पूर्व मंत्रियों डॉ. शेख मुस्तफा कमाल, धर्म पॉल और गुलाम हसन खान को श्रद्धांजलि देने के साथ शुरू होगी।
विधायक और जल जीवन मिशन (JJM) पर बनी हाउस कमेटी के चेयरमैन जस्टिस हसनैन मसूदी, जम्मू-कश्मीर में केंद्र प्रायोजित इस योजना को लागू करने में कथित अनियमितताओं पर कमेटी की रिपोर्ट पेश करेंगे। यह कमेटी पिछले साल 9 अप्रैल को बनाई गई थी। मंत्री जावेद अहमद डार जम्मू-कश्मीर सहकारी समिति अधिनियम, 1989 में संशोधन के लिए एक बिल भी पेश करेंगे। इसमें जम्मू-कश्मीर आत्मनिर्भर सहकारी अधिनियम, 1999 को रद्द करना और मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत आत्मनिर्भर सहकारी समितियों के बदलाव से जुड़े प्रावधान शामिल होंगे। सत्र के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा कई मुद्दे उठाए जाने की उम्मीद है, जिसमें विपक्ष खास तौर पर नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार द्वारा चुनावी वादों को पूरा न कर पाने के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करेगा।
जम्मू-कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की सहयोगी पार्टी होने के बावजूद, उनकी पार्टी विधानसभा में जनहित के मुद्दे उठाती रहेगी। कर्रा ने कहा, "हमने कांग्रेस विधायक दल की बैठक में अपनी आगे की रणनीति पर चर्चा की है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से सवाल उठाए जाएंगे। हम गठबंधन में हैं, लेकिन हमारा एक सैद्धांतिक रुख भी है और हम लोगों से जुड़े मुद्दे उठाने में पीछे नहीं हटेंगे।"
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने भी सत्र से पहले ट्रेड यूनियनों, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, पेशेवरों और मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की है। शर्मा के अनुसार, स्कूलों और अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी, खराब सड़कें, रोजगार, नागरिक सुविधाएं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी जनता की चिंताओं पर सरकार को तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले दो वर्षों में जनता की कई शिकायतों का जवाब देते हुए बार-बार अधिकारों की कमी का हवाला दिया है। शर्मा ने दिहाड़ी मजदूरों, टेक्निकल असिस्टेंट, आशा वर्करों, आंगनवाड़ी वर्करों और नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि नौकरी की सुरक्षा, वेतन और नौकरी पक्की करने से जुड़ी उनकी मांगों पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए।
इस बीच, स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने हाल ही में 'ऑल-पार्टी और बिज़नेस एडवाइज़री कमिटी' की बैठक की अध्यक्षता की, ताकि सदन की कार्यवाही सुचारू और व्यवस्थित ढंग से चल सके। स्पीकर ने कहा, "लोग विधानसभा की कार्यवाही पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि जनता से जुड़े अहम मुद्दे उठाएंगे। इससे हर सदस्य पर बड़ी ज़िम्मेदारी आती है। यह ज़रूरी है कि सभी सदस्य सदन की गरिमा, अनुशासन और मर्यादा बनाए रखें।" उम्मीद है कि इस सत्र में तीखी बहस होगी, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही जम्मू-कश्मीर के लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाना चाहते हैं।