Srinagar श्रीनगर,  जल शक्ति मंत्री जावेद अहमद राणा ने मुख्यमंत्री (जिनके पास राजस्व विभाग का प्रभार भी है) की ओर से सदन को बताया कि पिछले दो वर्षों में कश्मीर डिवीज़न में 2,486 और जम्मू डिवीज़न में 24,058 EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। मंत्री, EWS कैटेगरी के तहत सर्टिफिकेट जारी करने में कश्मीर डिवीज़न के साथ भेदभाव के संबंध में MLA सज्जाद गनी लोन द्वारा पेश किए गए 'ध्यान आकर्षण नोटिस' का जवाब दे रहे थे। मंत्री ने कहा कि EWS सर्टिफिकेट तहसीलदार द्वारा सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों के अनुसार जारी किए जाते हैं।
इस विषय पर एक पूरक प्रश्न उठाते हुए, MLA सज्जाद लोन ने सरकार से जम्मू-कश्मीर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की एक समान और तर्कसंगत परिभाषा तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि EWS पात्रता निर्धारित करने के मानदंडों की समीक्षा प्रति व्यक्ति आय, सामाजिक स्थितियों और अन्य संबंधित सामाजिक-आर्थिक संकेतकों जैसे कारकों को ध्यान में रखकर की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि EWS कैटेगरी निर्धारित करने के मानदंड सभी राज्यों पर बाध्यकारी नहीं हैं और केंद्र शासित प्रदेश की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के अनुसार वर्तमान सरकार द्वारा इनकी समीक्षा या संशोधन किया जा सकता है।
उठाए गए मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए, सामाजिक कल्याण मंत्री सकीना इटू ने हस्तक्षेप किया और कहा कि EWS कैटेगरी निर्धारित करने वाले नियम केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए जाते हैं और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को निर्धारित मानदंडों को अपनाना आवश्यक है।
CPI(M) MLA मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि EWS कैटेगरी निर्धारित करने के लिए तय किए गए मानदंड जरूरी नहीं कि सभी राज्यों में समान रूप से लागू हों। उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों ने अपने स्वयं के मानदंड विकसित किए हैं और सुझाव दिया कि जम्मू-कश्मीर भी एक उपयुक्त तंत्र तैयार करते समय अन्य जगहों पर अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं की जांच कर सकता है। स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि यह मामला जांच के योग्य है और सरकार को विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाए गए EWS मानदंडों का अध्ययन करना चाहिए।
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