Jammu.जम्मू: स्थानीय नेता सुखनंदन ने चम्ब जिले में बसे शरणार्थियों के हित में सरकार से एक बार फिर आग्रह किया है कि उन्हें अपने निवास स्थान पर मालिकाना हक प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शरणार्थियों को उनकी जमीन या आवासीय स्थलों का स्थायी अधिकार नहीं मिला है, जिससे उनका जीवन अस्थिर और अनिश्चित बना हुआ है।
सुखनंदन ने इस अवसर पर कहा, “चम्ब शरणार्थियों ने दशकों से समाज और स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान दिया है। अब समय आ गया है कि सरकार उन्हें स्थायी अधिकार और सुरक्षा प्रदान करे। मालिकाना हक मिलने से शरणार्थियों को न केवल स्थायी निवास मिलेगा, बल्कि उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा और जीवन की संभावनाएं भी सुनिश्चित होंगी।”
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान व्यवस्था शरणार्थियों के लिए अस्थायी और असुरक्षित है। कई परिवार वर्षों से एक ही स्थान पर रह रहे हैं, लेकिन कानूनी अधिकार न होने के कारण उन्हें किसी भी समय बेदखल किया जा सकता है। सुखनंदन ने जोर देकर कहा कि यह कदम शरणार्थियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।
स्थानीय प्रशासन और समाजसेवी संगठनों ने भी सुखनंदन की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चम्ब शरणार्थियों ने स्थानीय रोजगार, कृषि और व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्हें स्थायी अधिकार दिए जाने से न केवल उनकी सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास में भी मददगार साबित होगा।
सुखनंदन ने सरकार से अपील की कि इस मामले में शीघ्र निर्णय लिया जाए और शरणार्थियों को उनके अधिकारों का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे में देरी और अनिश्चितता शरणार्थियों की चिंता और असंतोष को बढ़ा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शरणार्थियों को मालिकाना हक देने से सामाजिक एकता और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। इससे शरणार्थियों में अपने अधिकारों के प्रति विश्वास पैदा होगा और वे स्थानीय विकास में और सक्रिय योगदान दे सकेंगे।
सुखनंदन ने मीडिया से भी अपील की कि वे इस मुद्दे पर जनजागरूकता बढ़ाएँ और सरकार पर दबाव बनाएं कि वह शीघ्र निर्णय लेकर चम्ब शरणार्थियों को उनकी कानूनी संपत्ति और अधिकार सुनिश्चित करे।