Srinagar: कारगिल नायकों को रोल मॉडल बताया, सिन्हा ने रीडिंग मैराथन को दिखाई हरी झंडी

श्रीनगर में रीडिंग मैराथन, युवाओं को कारगिल नायकों से प्रेरणा लेने का संदेश

Update: 2026-07-25 07:51 GMT

श्रीनगर: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को यहाँ शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (एसकेआई सीसी) में पाँच किलोमीटर लंबी रीडिंग मैराथन को हरी झंडी दिखाई।

उन्होंने युवाओं से नशीली दवाओं से दूर रहने, जीवन भर पढ़ने की आदत डालने और एक हरे-भरे और स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया। छात्रों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए सिन्हा ने रीडिंग मैराथन को ज्ञान, शारीरिक फिटनेस और पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी का एक अनूठा संगम बताया। उन्होंने कहा कि यह मैराथन ज्ञान प्राप्त करने की संस्कृति और प्रकृति के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी का संगम है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भर के सैकड़ों छात्रों द्वारा दिखाया गया उत्साह इस क्षेत्र के युवाओं की अपार क्षमता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति क्लासरूम और पाठ्यपुस्तकों से परे शिक्षा की परिकल्पना करती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सीखने का परिणाम ज़िम्मेदार कार्यों और समाज में सक्रिय भागीदारी के रूप में दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबों या चार दीवारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह खेल, सामुदायिक भागीदारी, स्वस्थ जीवन और ज़िम्मेदार नागरिकता में दिखनी चाहिए।

उन्होंने रीडिंग मैराथन को राष्ट्रीकय नीति के विज़न का व्यावहारिक रूप बताया। चिनार बुक फेस्टिवल की थीम 'रन फॉर ए ग्रीन फ्यूचर' (हरे-भरे भविष्य के लिए दौड़) और इसके स्लोगन 'नशे को ना, किताबों को हाँ' का ज़िक्र करते हुए सिन्हा ने कहा कि इस पहल ने जीवन के तीन महत्वपूर्ण पहलुओं को सफलतापूर्वक एक साथ लाया है—पाँच किलोमीटर की दौड़ के माध्यम से शारीरिक फिटनेस, पढ़ने के माध्यम से बौद्धिक विकास और टिकाऊ जीवन शैली के माध्यम से पर्यावरण के प्रति जागरूकता। उन्होंने कहा कि पढ़ने से नज़रिया व्यापक होता है और सोच पैनी होती है जबकि दौड़ने से शारीरिक शक्ति और अनुशासन बढ़ता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रकृति की रक्षा करना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि किताबों में जलवायु परिवर्तन या स्वास्थ्य के बारे में पढ़ना आसान है, लेकिन सच्ची शिक्षा तब दिखती है जब हम काम करते हैं—चाहे वह फिटनेस के लिए दौड़ना हो, पर्यावरण की रक्षा करना हो या खुद को नशीली दवाओं से दूर रखना हो। सिन्हा ने युवाओं से सकारात्मक सामाजिक बदलाव के दूत बनने का आह्वान करते हुए उनसे कहा कि वे पढ़ने को रोज़ाना की आदत बनाएं, पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार तौर-तरीके अपनाएं और मैराथन के बाद भी समाज की सेवा करते रहें। उन्होंने कहा कि ये मूल्य ऐसे ज़िम्मेदार नागरिक तैयार करने में मदद करेंगे जो राष्ट्र-निर्माण में सार्थक योगदान देने में सक्षम हों।

26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाए जाने का जिक्र करते हुए उपराज्यपाल ने 1999 के कारगिल युद्ध के नायकों को श्रद्धांजलि दी और युवाओं से उनके साहस और बलिदान से प्रेरणा लेने का आग्रह किया।

उन्होंने बताया कि देश के कई सबसे बहादुर सैनिक जिनमें कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज कुमार पांडे और कैप्टन अनुज नय्यर शामिल हैं, देश की रक्षा में अपनी जान देते समय 20 से 25 साल की उम्र के थे।

उन्होंने हमें 'राष्ट्र सर्वोपरि', अनुशासन, नेतृत्व और कभी हार न मानने की भावना जैसे मूल्य सिखाए। ये आदर्श हर युवा भारतीय को प्रेरित करते रहने चाहिए।

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