Kashmir कश्मीर में 20 दिन बाद लौटी स्कूलों की रौनक, छात्रों के चेहरों पर दिखी खुशी
श्रीनगर। लगभग 20 दिनों तक बंद रहने के बाद कश्मीर घाटी के स्कूलों में एक बार फिर बच्चों की चहल-पहल लौट आई। सोमवार को जैसे ही स्कूलों के दरवाजे खुले, छात्र-छात्राएं उत्साह के साथ अपनी कक्षाओं में पहुंचे। लंबे अंतराल के बाद दोस्तों और शिक्षकों से मुलाकात होने पर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। स्कूल परिसरों में फिर से प्रार्थना सभा, कक्षाएं और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां शुरू होने से सामान्य स्थिति की वापसी का संदेश मिला।
बीते कुछ सप्ताह के दौरान सुरक्षा कारणों और हालात को देखते हुए कई सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों को एहतियात के तौर पर बंद रखा गया था। इस दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई, हालांकि कई स्कूलों ने ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई जारी रखने की कोशिश की। इसके बावजूद अधिकांश छात्रों और अभिभावकों का मानना था कि नियमित कक्षाओं का कोई विकल्प नहीं हो सकता। स्कूल खुलने के पहले दिन प्रशासन ने सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए। कई स्थानों पर पुलिस और सुरक्षा बल तैनात रहे ताकि छात्र, शिक्षक और अभिभावक सुरक्षित माहौल में स्कूल पहुंच सकें। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी विभिन्न स्कूलों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और यह सुनिश्चित किया कि पढ़ाई बिना किसी बाधा के शुरू हो सके।
पहले दिन स्कूलों में उपस्थिति सामान्य रही और कई स्थानों पर छात्रों की संख्या उम्मीद से अधिक दर्ज की गई। शिक्षकों ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें पढ़ाई की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ने का प्रयास किया। साथ ही आगामी परीक्षाओं और पाठ्यक्रम की भरपाई के लिए विशेष योजना पर भी काम शुरू किया गया। कई स्कूलों ने अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित करने की तैयारी की है ताकि बंदी के दौरान हुए शैक्षणिक नुकसान की भरपाई की जा सके। अभिभावकों ने भी स्कूल खुलने पर राहत जताई। उनका कहना है कि लंबे समय तक स्कूल बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके मानसिक और सामाजिक विकास पर भी असर पड़ता है। नियमित रूप से स्कूल जाने से बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और सीखने की प्रक्रिया बेहतर होती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल केवल पढ़ाई का माध्यम नहीं होते, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं। ऐसे में शिक्षण संस्थानों का दोबारा खुलना छात्रों के भविष्य के लिए सकारात्मक कदम है। अब शिक्षा विभाग का फोकस नियमित शैक्षणिक गतिविधियों को गति देने, पाठ्यक्रम पूरा कराने और विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को मजबूत बनाने पर रहेगा। स्कूल खुलने के साथ ही कश्मीर घाटी में सामान्य जनजीवन लौटने के संकेत भी दिखाई देने लगे हैं। छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में शैक्षणिक गतिविधियां बिना किसी व्यवधान के जारी रहेंगी और बच्चे पूरे मन से अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकेंगे।