जम्मू-कश्मीर: कठुआ जिले में वाहनों की फिटनेस जांच प्रक्रिया बंद होने से वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों की परेशानियां बढ़ गई हैं। परिवहन विभाग के नए आदेश के बाद अब कठुआ में वाहनों की फिटनेस जांच नहीं हो सकेगी। वाहन मालिकों को अपनी गाड़ियों की फिटनेस करवाने के लिए करीब 40 किलोमीटर दूर सांबा के विजयपुर या जम्मू के सयोड़ा स्थित निजी ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर जाना पड़ेगा।
परिवहन विभाग के इस फैसले से कठुआ जिले के ट्रांसपोर्टरों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर सुविधा बंद कर देने से उन्हें अतिरिक्त समय और पैसे खर्च करने पड़ेंगे। वाहन मालिकों ने सवाल उठाया है कि जब कठुआ में लंबे समय से फिटनेस जांच की व्यवस्था चल रही थी तो इसे अचानक बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी।
जानकारी के अनुसार, नए नियमों के तहत अब वाहनों की फिटनेस जांच ऑटोमेटिक मशीनों के माध्यम से कराना अनिवार्य कर दिया गया है। कठुआ में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण वाहन मालिकों को अब दूसरे जिलों का रुख करना होगा। इससे खासकर छोटे ट्रांसपोर्टरों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
बताया जा रहा है कि यह व्यवस्था पिछले वर्ष अक्टूबर से लागू होनी थी, लेकिन लगातार मिल रही छूट के कारण कठुआ में पुराने तरीके से ही वाहनों की फिटनेस जांच होती रही। इस प्रक्रिया में परिवहन विभाग के कर्मचारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होते थे। अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद पुरानी फिटनेस प्रक्रिया पूरी तरह बंद कर दी गई है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि कठुआ जिले के कई इलाकों से जम्मू या सांबा तक पहुंचना आसान नहीं है। बनी, बसोहली और बिलावर जैसे दूरदराज क्षेत्रों से वाहन मालिकों को पहले ही 70 से 80 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में फिटनेस जांच के लिए उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करनी होगी, जिससे खर्च और परेशानी दोनों बढ़ेंगे।
ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने इस फैसले के खिलाफ विरोध जताते हुए परिवहन विभाग से मांग की है कि कठुआ में दोबारा फिटनेस सुविधा शुरू की जाए। उनका कहना है कि जिले में बड़ी संख्या में व्यावसायिक वाहन चलते हैं और सभी वाहन मालिकों को दूर भेजना व्यावहारिक नहीं है।
ट्रांसपोर्टरों ने यह भी कहा कि फिटनेस जांच के लिए दूर जाने से वाहन चालकों का समय भी बर्बाद होगा। कई बार फिटनेस सेंटर पर लंबी कतारें लगने से एक दिन का काम प्रभावित हो सकता है। इससे छोटे वाहन मालिकों की आय पर भी असर पड़ेगा।
वहीं, परिवहन विभाग का कहना है कि नए नियम केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार लागू किए जा रहे हैं। ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर से वाहनों की जांच अधिक पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से हो सकेगी। विभाग ने वाहन मालिकों से नई व्यवस्था के अनुसार सहयोग करने की अपील की है।
फिलहाल कठुआ के ट्रांसपोर्टर इस फैसले से नाराज हैं और वे स्थानीय स्तर पर फिटनेस सुविधा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि विकास और नियमों के नाम पर वाहन मालिकों को अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना चाहिए। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रशासन और ट्रांसपोर्टरों के बीच बातचीत होने की संभावना है।