Jammu.जम्मू: औषधीय और मूल्यवान पौधों (MAPs – Medicinal and Aromatic Plants) के सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए भद्रवाह में हाल ही में बायर-सेलर मीट का आयोजन किया गया। इस बैठक में किसानों, व्यवसायियों और निवेशकों ने भाग लिया, ताकि MAPs उद्योग में व्यापारिक अवसरों और सहयोग के नए मार्ग खोजे जा सकें।
मीट का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों और उद्यमियों को औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती, विपणन और निर्यात से जुड़ी जानकारी प्रदान करना था। आयोजकों ने बताया कि इस सेक्टर में न केवल रोजगार के अवसर हैं, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने MAPs की खेती के लाभ, सही तकनीक और आधुनिक विपणन रणनीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है और किसानों के लिए यह एक लाभकारी व्यवसाय बन सकता है। बायर-सेलर मीट में निवेशकों और व्यवसायियों ने सीधे किसानों से संपर्क कर कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री और सहयोग के अवसर तलाशे।
मीट में किसानों ने अपनी समस्याएँ और चुनौतियाँ साझा कीं। प्रमुख मुद्दों में गुणवत्ता नियंत्रण, उचित मूल्य निर्धारण और निर्यात प्रक्रियाओं की जानकारी शामिल थी। आयोजकों ने इन चुनौतियों के समाधान के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और मार्केट लिंकिंग की पेशकश की।
भद्रवाह मीट में यह भी बताया गया कि सरकार और निजी संस्थाएँ इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएँ और सब्सिडी प्रदान कर रही हैं। किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण, बीज और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की भी योजना बनाई गई है।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने जोर दिया कि MAPs सेक्टर में निवेश और नवाचार से स्थानीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि, रोजगार सृजन और निर्यात वृद्धि संभव है। उन्होंने कहा कि इस तरह की मीटें किसानों और व्यवसायियों के बीच सीधे संवाद को प्रोत्साहित करती हैं और नए व्यापारिक अवसर खोलती हैं।
मीट के समापन पर आयोजकों ने आश्वासन दिया कि इस तरह के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाएंगे ताकि किसानों और निवेशकों के बीच स्थायी सहयोग और नेटवर्किंग का अवसर बन सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि MAPs सेक्टर को बढ़ावा देने की यह पहल भद्रवाह और आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, औषधीय पौधों का उत्पादन बढ़ेगा और राज्य में इस उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।
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