ट्राउट मछली पर संकट सिंध नदी के पानी को लेकर रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
प्रदूषण इंसानों और ट्राउट मछलियों पर खतरा
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले की जीवनरेखा मानी जाने वाली सिंध नदी (सिंध नाला) में बढ़ता प्रदूषण अब इंसानों और जलीय जीवों के लिए चिंता का कारण बन गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट में सामने आया है कि नदी में कई जगहों पर बिना उपचारित सीवेज मिलने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे खासतौर पर ट्राउट मछली के आवास पर खतरा मंडरा रहा है। गांदरबल के कंगन और सोनमर्ग क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया। इसका मुख्य कारण आसपास के नालों से बिना ट्रीट किया गया घरेलू सीवेज सीधे नदी में गिरना बताया गया है।
ट्राउट मछली पालन पर मंडराया खतरा
सिंध नदी क्षेत्र कश्मीर में ट्राउट मछली पालन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। साफ और ठंडा पानी ट्राउट मछली के लिए अनुकूल होता है, लेकिन बढ़ते प्रदूषण से इस पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सीवेज का बहाव नहीं रोका गया तो आने वाले समय में मछलियों की संख्या और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
तीन जगहों पर मिली गड़बड़ी
CPCB ने सिंध नाले के अलग-अलग हिस्सों से पानी के नमूने लिए थे। जांच में कंगन अखल ब्रिज, सोनमर्ग शुतकड़ी ब्रिज और सोनमर्ग क्षेत्र में कुछ मानकों पर चिंता जताई गई। रिपोर्ट में इन जगहों पर कुल कोलीफॉर्म का स्तर अधिक पाया गया, जो पानी में जैविक प्रदूषण का संकेत माना जाता है। हालांकि नदी के कई हिस्सों में पानी की गुणवत्ता वन्यजीव और मछली पालन के लिए तय मानकों के अनुरूप भी पाई गई, लेकिन सीवेज वाले नालों से लगातार प्रदूषित पानी आने को बड़ा खतरा बताया गया है।
अधूरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बना चिंता
रिपोर्ट में सोनमर्ग के 1.2 MLD सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का भी जिक्र किया गया है। निरीक्षण के दौरान यह प्लांट अभी पूरी तरह चालू नहीं पाया गया। अधिकारियों ने इसे शुरू होने में कुछ और समय लगने की जानकारी दी। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि नदी को बचाने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था को जल्द पूरा करना और गंदे पानी के सीधे बहाव पर रोक लगाना जरूरी है।
लोगों की सेहत पर भी असर की आशंका
सिंध नदी स्थानीय लोगों के लिए पानी का महत्वपूर्ण स्रोत है। नदी में प्रदूषण बढ़ने से पानी के इस्तेमाल और स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। लंबे समय तक दूषित पानी के संपर्क में रहने से लोगों और जलीय जीवों दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। CPCB ने संबंधित एजेंसियों को सीवेज का उचित उपचार सुनिश्चित करने और नदी की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है, ताकि प्रदूषण को बढ़ने से रोका जा सके।