श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर सरकार ने विकास परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने और प्रशासनिक प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब 30 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को संबंधित विभाग अपने स्तर पर मंजूरी दे सकेंगे। इससे छोटी और मध्यम स्तर की विकास योजनाओं के लिए फाइलों को बार-बार उच्च स्तर पर भेजने की जरूरत कम होगी।
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना और विकास कार्यों को जमीन पर तेजी से लागू करना है। विभागों को अधिक अधिकार मिलने से प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया भी तेज होने की उम्मीद है।
फाइलों के निपटारे में आएगी तेजी
अब तक कई विकास परियोजनाओं को मंजूरी के लिए विभिन्न प्रशासनिक स्तरों से गुजरना पड़ता था। इससे परियोजनाओं की शुरुआत में देरी होने की संभावना रहती थी। नई व्यवस्था के बाद 30 करोड़ रुपये तक की योजनाओं पर विभागीय स्तर पर निर्णय लिया जा सकेगा। इससे सड़क, पुल, भवन, जलापूर्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
विभागों को मिलेगी ज्यादा जिम्मेदारी
अधिकारों के विकेंद्रीकरण से संबंधित विभागों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। विभागों को परियोजनाओं की जरूरत, लागत, तकनीकी पहलुओं और वित्तीय नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए निर्णय लेना होगा। सरकार का मानना है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया को निचले प्रशासनिक स्तर तक ले जाने से काम में तेजी और जवाबदेही दोनों बढ़ाई जा सकती हैं।
विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार
जम्मू-कश्मीर में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। परियोजनाओं की मंजूरी में लगने वाला समय कम होने से निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है। हालांकि, नई व्यवस्था के प्रभाव का वास्तविक आकलन इसके लागू होने के बाद ही किया जा सकेगा। यदि विभाग समयबद्ध तरीके से मंजूरियों और प्रक्रियाओं को पूरा करते हैं, तो इससे लंबित फाइलों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।
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