Jammu.जम्मू: कश्मीर पंडित संघ (केपीएस) ने केंद्र और राज्य सरकार से पंडित समुदाय के पुनर्वास के लिए त्वरित और निर्णायक कदम उठाने का आग्रह किया है। संघ ने कहा कि कई वर्षों से पंडित परिवार अपने मूल स्थानों से विस्थापित हैं और उनकी सुरक्षा, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान सुनिश्चित करना अब और भी आवश्यक हो गया है।
केपीएस ने एक बयान में कहा कि प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद विस्थापित पंडितों का पुनर्वास धीमी गति से हो रहा है और यह प्रक्रिया उनके जीवन और सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है। संघ ने सरकार से यह भी कहा कि पुनर्वास नीतियों में पारदर्शिता, उचित योजना और समयबद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
संघ ने जोर देकर कहा कि पंडित समुदाय का सुरक्षित और सम्मानजनक पुनर्वास न केवल उनके अधिकारों की सुरक्षा करता है बल्कि कश्मीर में सामाजिक और सांस्कृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। केपीएस ने सरकार को आगाह किया कि समय पर निर्णायक कदम न उठाए जाने पर समुदाय में असंतोष बढ़ सकता है।
केपीएस के अध्यक्ष ने कहा, “हमने कई बार सरकार से आग्रह किया है कि पुनर्वास योजनाओं को तुरंत लागू किया जाए। यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि हमारे समुदाय के अस्तित्व और सुरक्षा का सवाल है। हम चाहते हैं कि सरकार इस दिशा में ठोस और त्वरित कार्रवाई करे।”
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक विस्थापित रहने के कारण पंडित समुदाय में रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे गंभीर हो गए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को पुनर्वास के साथ-साथ आजीविका, स्वास्थ्य और शिक्षा के स्थायी उपाय भी सुनिश्चित करने चाहिए।
केपीएस ने सरकार से यह भी अपील की कि विस्थापित पंडितों के लिए आवासीय योजनाओं और सुरक्षा उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पुनर्निर्माण भी पुनर्वास प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए।
संघ ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल न्याय और सम्मान के साथ पुनर्वास सुनिश्चित करना है, ताकि पंडित समुदाय अपने मूल स्थानों पर लौटकर शांतिपूर्ण जीवन जी सके। उन्होंने सरकार से कहा कि इसके लिए निर्णायक और समयबद्ध कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।