Jammu.जम्मू: महिला कांग्रेस द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण की स्थिति और इसकी कमियों पर गहन चर्चा हुई। इस सम्मेलन में देशभर की महिला नेताओं, समाजसेवियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और महिलाओं के विकास, समानता और सशक्तिकरण में मौजूद अवरोधों और चुनौतियों को उजागर किया।
सम्मेलन में यह सामने आया कि महिला सशक्तिकरण सिर्फ नीतियों में दिखने वाला शब्द नहीं है, बल्कि इसे जमीन पर सही मायनों में लागू करना बेहद जरूरी है। वक्ताओं ने कहा कि कई सरकारी योजनाएं और कार्यक्रम मौजूद होने के बावजूद महिलाओं तक उनकी सही जानकारी, पहुंच और लाभ नहीं पहुंच पा रहे हैं।
महिला कांग्रेस की प्रमुख ने कहा, “हमारी महिलाएं शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में आज भी पीछे हैं। नीतियों की कमी नहीं, बल्कि उनका सही कार्यान्वयन और महिलाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना चुनौती है।” उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण और वंचित इलाकों में महिलाओं को पर्याप्त संसाधन और अवसर नहीं मिल पा रहे।
सम्मेलन में महिला सुरक्षा, रोजगार सृजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल साक्षरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार किया गया। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को समान अवसर और आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोर दिया कि सामाजिक रूढ़ियों और भेदभाव को तोड़ने के लिए शिक्षा और जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज और परिवार में भी महिलाओं की भागीदारी और समानता सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने यह सुझाव दिया कि महिलाओं के नेतृत्व में निर्णय लेने की प्रक्रिया को बढ़ावा देना और उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना जरूरी है।
सम्मेलन में यह भी चर्चा हुई कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी उपकरणों का उपयोग बढ़ाना चाहिए। इससे महिलाएं स्वावलंबी बनेंगी और उनके आर्थिक और सामाजिक विकास में तेजी आएगी।
महिला कांग्रेस ने इस अवसर पर सरकार से यह मांग भी की कि महिला कल्याण योजनाओं का निगरानी तंत्र मजबूत किया जाए और उनके लाभार्थियों तक योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
सम्मेलन में भाग लेने वाली महिलाओं ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, उनके अधिकारों की सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास करना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में समाज, सरकार और स्वयं महिलाओं को मिलकर काम करना होगा।