Jammu : कुलगाम हमले के बाद मजदूरों की सुरक्षा बढ़ी

Update: 2026-08-05 04:23 GMT

श्रीनगर । दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की मौत के बाद अब क्षेत्र में काम कर रहे प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। घटना के कुछ दिनों बाद कई ईंट-भट्ठा मालिकों ने मजदूरों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि बाहरी राज्यों से आने वाले मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए निगरानी तथा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

पिछले सप्ताह कुलगाम के केलम इलाके में एक आतंकवादी ने छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों को निशाना बनाया था। बताया गया कि हमलावर ने दोनों मजदूरों पर गोलीबारी की, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद स्थानीय लोगों और सुरक्षा एजेंसियों की मदद से दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

आतंकी हमले के बाद ईंट-भट्ठा संचालकों ने अपने यहां काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। कई मालिकों ने मजदूरों के रहने वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ाने, बाहरी लोगों की आवाजाही पर नजर रखने और सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि मजदूर दूर-दराज के क्षेत्रों में रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है।

कश्मीर के कई इलाकों में देश के अलग-अलग राज्यों से मजदूर काम करने के लिए आते हैं। इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और अन्य राज्यों के श्रमिक शामिल हैं। ये मजदूर अक्सर ईंट-भट्ठों, निर्माण कार्यों और अन्य दिहाड़ी मजदूरी से जुड़े कामों में लगे होते हैं। आतंकी घटनाओं में प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाए जाने से इन समुदायों में चिंता का माहौल पैदा हुआ है।

ईंट-भट्ठा मालिकों का कहना है कि मजदूर उनकी आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। कई स्थानों पर मजदूरों के रहने वाले क्षेत्रों में रात के समय निगरानी बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ संपर्क बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां भी इस घटना के बाद सतर्क हो गई हैं। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन की ओर से भी प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को दें। साथ ही, मजदूरों और बाहरी राज्यों से आए लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

छत्तीसगढ़ के मजदूरों की मौत ने उनके परिवारों को भी गहरा आघात पहुंचाया है। रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्य गए मजदूरों के साथ हुई इस घटना के बाद उनके परिजनों में भय और दुख का माहौल है। सरकार और प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आतंकी संगठनों का उद्देश्य अक्सर डर का माहौल पैदा करना होता है, ताकि आम जनजीवन प्रभावित हो। ऐसे में प्रवासी मजदूरों और स्थानीय लोगों के बीच विश्वास बनाए रखना और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना बेहद जरूरी है।

ईंट-भट्ठा मालिकों द्वारा उठाए जा रहे सुरक्षा कदमों को इसी दिशा में एक प्रयास माना जा रहा है। हालांकि, केवल निजी स्तर पर सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि प्रशासन, पुलिस और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा।

फिलहाल कुलगाम हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हुई हैं और हमलावरों की तलाश जारी है। वहीं, ईंट-भट्ठा मालिक अपने स्तर पर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि दूरदराज के इलाकों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए और अधिक प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है।

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