JAMMU.जम्मू: वरिष्ठ राजनयिक और विश्लेषक मुफ़्ती ने कहा कि हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम में ईरान ने अपनी कठोर रुख अपनाते हुए अमेरिका और इज़राइल के बीच बातचीत कराने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि ईरान की कूटनीतिक पहल से संभावित संघर्ष की स्थिति टली और वैश्विक शांति के प्रयासों को बल मिला।
मुफ़्ती ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान ने अपनी रणनीति स्पष्ट रूप से रखी और अमेरिकी-इज़राइली वार्ता के लिए आवश्यक दबाव और मंच तैयार किया। उन्होंने कहा, “अगर ईरान ने सक्रिय भूमिका नहीं निभाई होती, तो हालात और जटिल हो सकते थे। यह दिखाता है कि कूटनीति और संवाद से ही तनावपूर्ण परिस्थितियों का समाधान संभव है।”
उन्होंने आगे कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी हल नहीं है और इससे केवल विनाश और अस्थिरता बढ़ती है। मुफ़्ती ने जोर दिया कि सभी पक्षों को संवाद और कूटनीतिक माध्यमों के जरिए विवादों का समाधान करना चाहिए।
विशेषज्ञ ने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस तरह की मध्यस्थता से वैश्विक शांति को बढ़ावा मिलता है और भविष्य में ऐसे संघर्षों को टालने में मदद मिलती है।
मुफ़्ती ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल के बीच वार्ता का आयोजन इस बात का संकेत है कि कूटनीति अभी भी सबसे प्रभावी और स्थायी विकल्प है। उन्होंने दोनों देशों को सुझाव दिया कि वे ईरान के सहयोग को समझें और इसे शांति स्थापना की दिशा में उपयोग करें।
राजनीतिक विश्लेषकों ने भी मुफ़्ती के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ईरान की सक्रिय भूमिका ने वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण अन्य देशों को भी संवाद और समझौते के माध्यम से समस्याओं को हल करने की प्रेरणा देगा।
अंततः, मुफ़्ती ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि शांति और बातचीत ही संघर्ष के समाधान का स्थायी रास्ता हैं। उन्होंने कहा कि सभी देशों को जिम्मेदारी के साथ संवाद के माध्यम से समाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए।