Jammu.जम्मू: समाज में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित महिला आरक्षण बिल हाल ही में संसद में पास नहीं हो सका। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रिया ने विपक्षी पार्टियों की कड़ी आलोचना की और उन्हें महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर गंभीरता दिखाने की सलाह दी।
प्रिया ने कहा कि महिला आरक्षण बिल महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व का समान अवसर देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। लेकिन विपक्षी दलों की नकारात्मक भूमिका के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि महिलाओं के मुद्दों को राजनीति की अड़चनों के कारण पीछे छोड़ना समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने आगे कहा कि संसद में महिला आरक्षण बिल के विफल होने से महिलाओं के लिए राजनीतिक निर्णयों में उनकी भागीदारी सीमित रहेगी। प्रिया ने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे सिर्फ वोट बैंक या राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि जनहित और समान अवसर के लिए अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाएं।
प्रिया ने यह भी कहा कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल कानून या बिल तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए राजनीतिक नेतृत्व, समाज और संस्थागत सुधार सभी मिलकर काम करें। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकार और प्रतिनिधित्व पर समझौता समाज की प्रगति को रोकता है।
इसके अलावा, प्रिया ने भविष्य में महिला आरक्षण को लेकर सक्रिय पहल करने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संगठन और सामाजिक समूह मिलकर इस मुद्दे को फिर से संसद के एजेंडे में लाएंगे और इसके पारित होने के लिए व्यापक समर्थन जुटाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि महिला आरक्षण बिल का विफल होना राजनीतिक दलों की असहमति और रणनीतिक विरोध का परिणाम है। प्रिया की आलोचना इस ओर इशारा करती है कि महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीतिक एकजुटता की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, प्रिया का यह बयान न केवल विपक्षी दलों की नीतियों की आलोचना करता है, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रतिनिधित्व और अधिकारों के महत्व को भी रेखांकित करता है। इसके साथ ही यह महिलाओं और उनके समर्थकों को प्रेरित करता है कि वे इस मुद्दे पर सक्रिय रहें और भविष्य में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए आंदोलन जारी रखें।