Jammu : आम आदमी की रसोई महंगी, वैश्विक अस्थिरता से बजट पर बढ़ा 15% बोझ

Update: 2026-06-02 11:02 GMT

Jammu जम्मू: वैश्विक स्तर पर चल रही अस्थिरता और पश्चिम एशिया में ईरान-ईराक-अमेरिका संघर्ष के बीच जम्मू में आम आदमी की रसोई का बजट पिछले तीन महीनों में करीब 15 प्रतिशत बढ़ गया है। विशेषज्ञों और स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतें महंगी होती जा रही हैं।

स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक, युद्ध की शुरुआत होते ही खाद्य तेल के दाम में तेजी आई। इसके बाद मसाले भी औसतन दस प्रतिशत तक महंगे हो गए। अब दूध और दही की कीमतें भी लगभग दस प्रतिशत बढ़ चुकी हैं। हालांकि सरकारी आदेशों के मुताबिक दूध और दही के दाम पांच रुपये प्रति किलो बढ़ाए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर कई दुकानों पर यह बढ़ोतरी दस रुपये प्रति किलो तक लागू हो गई है।

एक स्थानीय गृहिणी ने कहा, "रोजमर्रा की खरीदारी करना मुश्किल हो गया है। पहले जो बजट हमें महीने भर चलता था, अब उसी में 15 प्रतिशत ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। खासकर दूध, तेल और मसाले जैसी मूलभूत वस्तुएं पहले से महंगी हो गई हैं।"

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक युद्ध और तेल संकट के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। तेल के बढ़ते दाम सीधे तौर पर खाद्य तेल की कीमतों पर असर डालते हैं। इसके अलावा मसाले और डेयरी उत्पादों के दाम में वृद्धि का कारण उत्पादन लागत और परिवहन शुल्क में बढ़ोतरी भी है।

वहीं व्यापार संघ ने प्रशासन से अपील की है कि बढ़ती कीमतों पर नजर रखी जाए और आवश्यक वस्तुओं की उचित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। संघ का कहना है कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है।

स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि पिछले तीन महीनों में खाद्य तेल की कीमतों में लगभग 12-15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मसालों में औसत बढ़ोतरी लगभग 10 प्रतिशत रही है। दूध और दही की कीमतों में आधिकारिक स्तर पर पांच रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन बाजार में यह दस रुपये तक पहुंच गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अस्थिरता का असर केवल जम्मू तक सीमित नहीं है। देश के कई हिस्सों में भी रसोई का बजट बढ़ रहा है और नागरिकों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव जारी रहा, तो घरेलू बाजार में मूलभूत वस्तुओं की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

अमूमन रोजमर्रा की जरूरतों में तेल, मसाले, दूध और दही जैसे उत्पादों की बढ़ती कीमतें आम परिवारों के बजट को प्रभावित कर रही हैं। नागरिकों का कहना है कि उन्हें अब पुराने बजट में समायोजन करना मुश्किल हो गया है।

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